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CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1

जामुन का पेड़

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.

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Krishna Sobti

Summary

अप़्ाफसोस इस बात का नहीं है कि मौत बेरहम है। अप़् फसोस इस बात का है कि अस्पताल बेरहम क्यों हैं\ (आईने के सामने) कृश्नचंदर (जिला-गुजरांकलां) की डाली (कहानी-संग्रह)_ शिकस्त] जरगाँव की रानी] सड़क वापस जाती है] आसमान रौशन है] एक गधो की आऋमकथा] अन्नदाता] हम वहशी हैं] जब खेत जागे] बावन पटो] एक वायलिन समंदर के किनारे] कागज की नाव] मेरी यादों के किनारे (उपन्यास) म्ऋयुः सन्१९७७ प्रेमचंद के बाद जिन कहानीकारों ने कहानी विध काे नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया] उनमें उदू़ कथाकार कृश्नचंदर का नाम महऋवपूण़ है। प्रगतिशील लेखक संघ से उनका गहरा संबंद्था] जिसका असर उनकी रचनाओं में स्पष्ट :प से झलकता है। कृश्नचंदर ऐसे गिने-चुने लेखकाें में आते हैं] जिन्होंने बाद में चलकर लेखन काे ही रोजी-रोटी का सहारा बनाया। कृश्नचंदर की प्राथमिक शिक्षा पुंछ (जम्मू एवं कश्मीर) में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे सन्१९३० में लाहौर आ गए और फाॉरमेन क्रिश्चियन काॉलेज में प्रवेश लिया।

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१९३४ में पंजाब विश्वि|ालय से उन्होंने अंग्रेजी में एम-ए- किया। बाद में उनका जुड़ाव पि़्ाफल्म जगत से हो गया और अंतिम समय तक वे मुंबई में ही रहे। यों तो कृश्नचंदर ने उपन्यास] नाटक] रिपोता़जा और लेख भी बहुत से लिखे हैं] लेकिन उनकी पहचान कहानीकार के :प में अद्कि हुई है। महाल{मी का पुल] आईने के सामने आदि उनकी मशहूर कहानियाँ हैं। उनकी लोकप्रियता इस कारण भी है कि वे काव्याऋमक रोमानियत और शैली की विविद्ता के कारण अलग मुकाम बनाते हैं। कृश्नचंदर उदू़ कथा-साहिऋय में अनूठी रचनाशीलता के लिए बहुचचि़त रहे हैं। वे प्रगतिशील और यथाथ़वादी नजरिए से लिखे जाने वाले साहिऋय के पक्षधार थे। जामुन का पेड़ कृश्नचंदर की एक प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कथा है। हास्य-व्यंग्य के लिए चीजों काे अनुपात से जयादा पैफला-पुफलाकर दिखलाने की परिपाटी पुरानी है और यह कहानी भी उसका अनुपालन करती है। इसलिए यहाँ घटनाएँ अतिशयोक्ति- पूण़ और अविश्वसनीय जान पड़ें] तो काेई हैरत नहीं। विश्वसनीयता ऐसी रचनाओं के मूल्यांकन की कसौटी नहीं हो सकती।

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प्रस्तुत पाठ में हँसते-हँसते ही हमारे भीतर इस बात की समझ पैदा होती है कि काया़लयी तौर-तरीकाें में पाया जाने वाला विस्तार कितना निरथ़क और पदानुक्रम कितना हास्यास्पद है। बात यहीं तक नहीं रहती\ इस व्यवस्था के संवेदनशून्य एवं अमानवीय होने का पक्ष भी हमारे सामने आता है। जामुन का पेड़ रात काे बड़े जोर का झक्कड़ चला। सेव्रेफटेरियेट के लाॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा। सवेरे काे जब माली ने देखा] तो उसे पता चला कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया] चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्लव़फ के पास गया] क्लव़फ दौड़ा-दौड़ा सुपरिंटेंडेंट के पास गया] सुपरिंटेंडेंट दौड़ा-दौड़ा बाहर लाॉन में आया। मिनटों में गिरे हुए पेड़ के नीचे दबे हुए आदमी के चाराें ओर भीड़ इक_ी हो गई। “बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था!** एक क्लव़फ बोला। “और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं!** दूसरा क्लव़फ याद करते हुए बोला।

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“मैं फलों के मौसम में झोली भरकर ले जाता था] मेरे बच्चे इसकी जामुनें कितनी खुशी से खाते थे।** तीसरा क्लव़फ लगभग #आँसा होकर बोला। “मगर यह आदमी\** माली ने दबे हुए आदमी की तरप़्ाफ इशारा किया। “हाँ] यह आदमी।** सुपरिंटेंडेंट सोच में पड़ गया। “पता नहीं जिंादा है कि मर गया\** एक चपरासी ने पूछा। “मर गया होगा] इतना भारी पेड़ जिसकी पीठ पर गिरे वह बच वैफसे सकता है\** दूसरा चपरासी बोला। “नहीं] मैं जिंदा हूँ।** दबे हुए आदमी ने बड़ी कठिनता से कराहते हुए कहा। “जिंदा है!** एक क्लव़फ ने ताज्जाुब से कहा। “पेड़ काे हटाकर इसे जल्दी से निकाल लेना चाहिए।** माली ने सुझाव दिया।

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“मुश्किल मालूम होता है]** एक सुस्त] कामचोर और मोटा चपरासी बोला] “पेड़ का तना बहुत भारी और वजनी है।** “क्या मुश्किल है\** माली बोला] “अगर सुपरिंटेंडेंट साहब हुक्म दें] तो अभी पंद्रह-बीस माली] चपरासी और क्लव़फ लगाकर पेड़ के नीचे से दबे हुए आदमी काे निकाला जा सकता है।** “माली ठीक कहता है]** बहुत-से क्लव़फ एक साथ बोल पड़े]“लगाओ जोर] हम तैयार हैं।** एक साथ बहुत से लोग पेड़ काे उठाने काे तैयार हो गए। “ठहरो!** सुपरिंटेंडेंट बोला] “मैं अंडर-सेव्रेफटरी से पूछ लूँ।** सुपरिंटेंडेंट अंडर-सेव्रेफटरी के पास गया। अंडर-सेव्रेफटरी डिप्टी सेव्रेफटरी के पास गया। डिप्टी सेव्रेफटरी ज्वाइंट सेव्रेफटरी के पास गया। ज्वाइंट सेव्रेफटरी चीप़्ाफ सेव्रेफटरी के पास गया। चीप़्ाफ सेव्रेफटरी मिनिस्टर के पास गया। मिनिस्टर ने चीप़्ाफ सेव्रेफटरी से कुछ कहा। चीप़् फ सेव्रेफटरी ने ज्वाइंट सेव्रेफटरी से कुछ कहा। ज्वाइंट सेव्रेफटरी ने डिप्टी सेव्रेफटरी से कहा। डिप्टी सेव्रेफटरी ने अंडर सेव्रेफटरी से कहा। प़्ाफाइल चलती रही।

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इसी में आधा दिन बीत गया। दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के चाराें ओर बहुत भीड़ हो गई थी। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कुछ मनचले क्लकाेएं ने समस्या काे खुद ही सुलझाना चाहा। वे हुकूमत के पैफसले का इंतजार किए बिना पेड़ काे अपने-आप हटा देने का निश्चय कर रहे थे कि इतने में सुपरिंटेंडेंट प़्ाफाइल लिए भागा-भागा आया। बोला “हमलोग खुद इस पेड़ काे नहीं हटा सकते। हमलोग व्यापार-विभाग से संबंधिात हैं] और यह पेड़ की समस्या है] जो कृषिा-विभाग के अधाीन है। मैं इस प़्ाफाइल काे अजेएंट माव़फ करके कृषिा-विभाग में भेज रहा हूँ वहाँ से उटार आते ही इस पेड़ काे हटवा दिया जाएगा।** दूसरे दिन कृषिा-विभाग से उटार आया कि पेड़ व्यापार-विभाग के लाॉन में गिरा है] इसलिए इस पेड़ काे हटवाने या न हटवाने की जिम्मेदारी व्यापार-विभाग पर पड़ती है। यह उटार पढ़कर व्यापार विभाग काे गुस्सा आ गया।

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उन्होंने फौरन लिखा कि पेड़ों काे हटवाने या न हटवाने की जिम्मेदारी कृषिा-विभाग पर लागू होती है] व्यापार विभाग का इससे काेई संबंधा नहीं है। दूसरे दिन भी प़्ाफाइल चलती रही। शाम काे जवाब आ गया–हम इस मामले काे हाॉटी़कल्चर डिपाट़मेंट के हवाले कर रहे हैं] क्योंकि यह एक फलदार पेड़ का मामला है और एग्रीकल्चर डिपाट़मेंट अनाज और खेती-बाड़ी के मामलों में प़्ौफसला करने का हकदार है। जामुन का पेड़ चूँकि एक फलदार पेड़ है] इसलिए यह पेड़ हाॉटी़कल्चर डिपाट़मेंट के अंतग़त आता है। रात काे माली ने दबे हुए आदमी काे दाल-भात खिलाया] जबकि उसके चाराें तरप़्ाफ पुलिस का पहरा था कि कहीं लोग कानून काे अपने हाथ में लेकर पेड़ काे खुद से हटवाने की काेशिश न करें। मगर एक पुलिस कांस्टेबल काे दया आ गई और उसने माली काे दबे हुए आदमी काे खाना खिलाने की इजाजत दे दी। माली ने दबे हुए आदमी से कहा] “तुम्हारी प़्ाफाइल चल रही है] उम्मीद है कल तक प़् फसला हो जाएगा।** दबा हुआ आदमी कुछ नहीं बोला।

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माली ने पेड़ के तने काे धयान से देखकर कहा] “अच्छा हुआ कि तना तुम्हारे कूल्हे पर गिरा] अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हंी टूट जाती।** दबा हुआ आदमी फिर भी कुछ नहीं बोला। माली ने फिर कहा] “तुम्हारा यहाँ काेई वारिस है तो मुझे उसका अता-पता बताओ] मैं उन्हें खबर देने की काेशिश क:ँगा।** “मैं लावारिस हूँ।** दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्किल से कहा। माली खेद प्रकट करता हुआ वहाँ से हट गया। तीसरे दिन हाॉटी़कल्चर डिपाट़मेंट से जवाब आ गया। बड़ा कड़ा जवाब था और व्यंग्यपूण़! हाॉटी़कल्चर डिपाट़मेंट का सेव्रेफटरी साहिऋय-प्रेमी आदमी जान पड़ता था। उसने लिखा था] “आश्चय़ है] इस समय जब हम ^पेड़ लगाओ* स्कीम ऊँचे स्तर पर चला रहे हैं] हमारे देश में ऐसे सरकारी अप़्ाफसर मौजूद हैं जो पेड़ों काे काटने का सुझाव देते हैं] और वह भी एक फलदार पेड़ काे] और वह भी जामुन के पेड़ काे] जिसके फल जनता बड़े चाव से खाती है!

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हमारा विभाग किसी हालत में इस फलदार व्क्ष काे काटने की इजाजत नहीं दे सकता।** “अब क्या किया जाए\** इसपर एक मनचले ने कहा] “अगर पेड़ काटा नहीं जा सकता] तो इस आदमी ही काे काटकर निकाल लिया जाए।** “यह देखिए]** उस आदमी ने इशारे से बताया] “अगर इस आदमी काे ठीक बीच में से] यानी धाड़ से काटा जाए तो आधा आदमी इधार से निकल आएगा] आधा आदमी उधार से बाहर आ जाएगा और पेड़ वहीं का वहीं रहेगा। “मगर इस तरह तो मैं मर जाऊँगा।** दबे हुए आदमी ने आपटिा प्रकट करते हुए कहा। “यह भी ठीक कहता है।** एक क्लव़फ बोला। आदमी काे काटने वाली युटिाफ प्रस्तुत करने वाले ने भरपूर विरोधा किया] “आप जानते नहीं हैं] आजकल प्लास्टिक सज़री कितनी उÂति कर चुकी है। मैं तो समझता हूँ] अगर इस आदमी काे बीच में से काटकर निकाल लिया जाए तो प्लास्टिक सज़री से धाड़ के स्थान से इस आदमी काे फिर से जोड़ा जा सकता है।** इस बार प़्ाफाइल काे मेडिकल डिपाट़मेंट में भेज दिया गया।

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मेडिकल डिपाट़मेंट ने प़्ाफौरन एक्शन लिया और जिस दिन प़् फाइल उनके विभाग में पहुँची] उसके दूसरे ही दिन उन्होंने अपने विभाग का सबसे योग्य प्लास्टिक सज़न छान-बीन के लिए भेज दिया। सज़न ने दबे हुए आदमी काे अच्छी तरह टटोलकर] उसका स्वास्थ्य देखकर] खून का दबाव देखा] नाड़ी की गति काे परखा] दिल और पेफिड़ों की जाँच करके रिपोट़ भेज दी कि इस आदमी का प्लास्टिक ऑपरेशन तो हो सकता है] और ऑपरेशन सफल भी होगा] मगर आदमी मर जाएगा। इसलिए यह प़्ौफसला भी रख कर दिया गया। रात काे माली ने दबे हुए आदमी के मुँह में खिचड़ी डालते हुए उसे बताया कि अब मामला ऊपर चला गया है। सुना है कि कल सेव्रेफटेरियेट के सारे सेव्रेफटेरियों की मीटिंग होगी। उसमें तुम्हारा केस रखा जाएगा। उम्मीद है सब काम ठीक हो जाएगा।

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दबा हुआ आदमी एक आह भरकर धाीरे से बोला “ये तो माना कि तगाप़्ाुफल न करोगे लेकिन खाक हो जाएँगे हम तुमकाे खबर होने तकु!** * माली ने अचंभे से मुँह में उँगली दबा ली और चकित भाव से बोला] “क्या तुम शायर हो\** दबे हुए आदमी ने धाीरे से सिर हिला दिया। दूसरे दिन माली ने चपरासी काे बताया] चपरासी ने क्लव़फ काे] क्लव़फ ने हैड-क्लव़फ काे। थोड़ी ही देर में सेव्रेफटेरियेट में यह अप़्ाफवाह पैफल गई कि दबा हुआ आदमी शायर है। बस] फिर क्या था। लोगों का झुंड का झुंड शायर काे देखने के लिए * मिजा़ गालिब का शेर उमड़ पड़ा। इसकी चचा़ शहर में भी पैफल गई और शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शु: हो गए। सेव्रेफटेरियेट का लाॉन भाँति-भाँति के कवियों से भर गया और दबे हुए आदमी के चाराें ओर कवि-सम्मेलन का-सा वातावरण उऋपÂ हो गया। सेव्रेफटेरियेट के कई क्लव़फ और अंडर सेव्रेफटरी तक जिन्हें साहिऋय और कविता से लगाव था] #क गए। कुछ शायर दबे हुए आदमी काे अपनी कविताएँ और दोहे सुनाने लगे।

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कई क्लव़फ उसकाे अपनी कविता पर आलोचना करने काे मजबूर करने लगे। जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी एक कवि है] तो सेव्रेफटेरियेट की सब-कमेटी ने पैफसला किया कि चूँकि दबा हुआ आदमी एक कवि है] इसलिए इस प़्ाफाइल का संबंधा न एग्रीकल्चर डिपाट़मेंट से है] न हाॉटी़कल्चर डिपाट़मेंट से] बल्कि सिप़् ा़फ कल्चरल डिपाट़मेंट से है। कल्चरल डिपाट़मेंट से अनुरोधा किया गया कि जल्द से जल्द मामले का प़् फसला करके अभागे कवि काे इस फलदार पेड़ से छुटकारा दिलाया जाए। प़् फाइल कल्चरल डिपाट़मेंट के अनेक विभागों से गुजरती हुई साहिऋय अकादमी के सेव्रेफटरी के पास पहुँची। बेचारा सेव्रेफटरी उसी समय अपनी गाड़ी में सवार होकर सेव्रेफटेरियेट पहुँचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा। “तुम कवि हो\** उसने पूछा। “जी हाँ।** दबे हुए आदमी ने जावाब दिया। “किस उपनाम से शोभित हो\** “ओस।** “ओस\** सेव्रेफटरी जोर से चीखा] “क्या तुम वही ^ओस* हो] जिसका ग|-संग्रह ^ओस के फूल* अभी हाल ही में प्रकाशित हुआ है\, दबे हुए कवि ने हुँकार में सिर हिलाया।

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