CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1
अपू के साथ ढाई साल
Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.
Free online summary and notes for Aroh (CBSE Class 11 Hindi). Read it here, no PDF download needed.
About the author
Satyajit Ray
Summary
अच्छी तकनीक वह है जिसका इस्तेमाल दिखाई न पड़े। (पटकथा-१६ के साक्षाऋकार से) सऋयजित राय प्रमुख पि़्ाफल्मेंः अपराजिता] अपू का संसार] जलसाघर] देवी चा#लता] महानगर] गोपी गायेन बाका बायेन] पथेर पांचाली (बांग्ला)_ शतरंज के खिलाड़ी] सद्गति (हिंदी) किला] जहाँगीर की स्वण़ मुद्रा] बादशाही अँगूठी आदि। जीवन की उपलब्द्यिों पर ऑस्कर और भारतरऋन म्ऋयुः सन्१९९२ भारतीय सिनेमा काे कलाऋमक ऊँचाई प्रदान करने वाले पि़् फल्मकारों में सऋयजित राय अगली कतार में हैं। इनके निदे़शन में पहली प़् फीचर पि़् फल्म पथेर पांचाली (बांग्ला) १९५५ में प्रदशि़त हुई] उसने राय काे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्राप्त करनेवाला भारतीय निदे़शक बना दिया। इनकी प़्ाफीचर पि़् फल्मों की कुल संख्या तीस के लगभग है। इन पि़् फल्मों के जरिए इन्होंने पि़् फल्म विधा काे सम्द्ध ही नहीं किया बल्कि इस माधयम के बारे में निदे़शकाें और आलोचकाें के बीच एक समझ विकसित करने में भी अपना योगदान दिया।
Section 1 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
धयान देने की बात है कि इनकी जयादातर पि़्ाफल्में साहिऋयक कृतियों पर आधरित हैं। इनके पसंदीदा साहिऋयकारों में बांग्ला के विभूति भूषाण बं|ोपाधयाय से लेकर हिंदी के प्रेमचंद तक शामिल हैं। पि़्ाफल्मों के पटकथा-लेखन] संगीत-संयोजन एवं निदे़शन के अलावा राय ने बांग्ला में बच्चों एवं किशोरों के लिए लेखन का काम भी बहुत ही संजाीदगी के साथ किया है। इनकी लिखी कहानियों में जासूसी रोमांच के साथ-साथ पेड़-पौद्े तथा पशु-पक्षी का सहज संसार भी है। अपू के साथ ढाई साल नामक संस्मरण पथेर पांचाली पि़्ाफल्म के अनुभवों से संबंद्ति है जिसका निमा़ण भारतीय पि़् फल्म के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना के :प में दज़ है। इससे पि़् फल्म के स्जन और उसके व्याकरण से संबंद्ति कई बारीकियों का पता चलता है। यही नहीं] जो पि़् फल्मी दुनिया हमें अपने ग्लैमार से चुंधिायाती हुई जान पड़ती है] उसका एक ऐसा सच हमारे सामने आता है] जिसमें साधानहीनता के बीच अपनी कलाद्ष्टि काे साकार करने का संघषा़ भी है।
Section 2 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
इस पाठ का भाषांतर बांग्ला मूल से विलास गिते ने किया है। किसी पि़्ाफल्मकार के लिए उसकी पहली पि़् फल्म एक अबूझ पहेली होती है। बनने या न बन पाने की अमूत़ शंकाओं से घिरी। पि़् फल्म पूरी होती है तो पि़् लेता है। अपनी पहली पि़् फल्म की रचना के दौरान हर पि़् फल्मकार का अनुभव-संसार इतना रोमांचकारी होता है कि वह उसके जीवन में बचपन की स्म्तियों की तरह हमेशा जीवंत बना रहता है। इस अनुभव संसार में दाखिल होना उस बेहतरीन पि़्ाफल्म से गुजरने से कम नहीं है। अपू के साथ ढाई साल पथेर पांचाली पि़्ाफल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला था! इस ढाई साल नौकरी करता था। नौकरी के काम से जब प़्ाुफस़त मिलती थी] तब शूटिंग करता था। मेरे पास उस समय पया़प्त पैसे भी नहीं थे। पैसे खऋम होने के बाद] फिर से पैसे जमा होने तक शूटिंग स्थगित रखनी पड़ती थी। शूटिंग का आरंभ करने से पहले पि़्ाफल्म में काम करने के लिए कलाकार इक_ा करने का एक बड़ा आयोजन हुआ। विशेषाकर अपू की भूमिका निभाने के लिए छह साल का लड़का मिल ही नहीं रहा था।
Section 3 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
आखिर मैंने अखबार में उस संदभ़ में एक इश्तहार दिया। रासबिहारी एवेन्यू की एक बिलि्ंडग में मैंने एक कमरा भाड़े पर लिया था] वहाँ पर बच्चे इंटरव्यू के लिए आते थे। बहुत-से लड़के आए] लेकिन अपू की भूमिका के लिए मुझे जिस तरह का लड़का चाहिए था] वैसा एक भी नहीं था। एक दिन एक लड़का आया। उसकी गद़न पर लगा पाउडर देखकर मुझे शक हुआ। नाम पूछने पर नाजुक आवाज में वह बोला ^टिया*। उसके साथ आए उसके पिता जी से मैंने पूछा] ^क्या अभी-अभी इसके बाल कटवाकर यहाँ ले आए हैं\* वे सज्जन पकड़े गए। सच छिपा नहीं सके बोले] ^^असल में यह मेरी बेटी है। अपू की भूमिका मिलने की आशा से इसके बाल कटवाकर आपके यहाँ ले आया हूँ।** विज्ञापन देकर भी अपू की भूमिका के लिए सही तरह का लड़का न मिलने के कारण मैं तो बेहाल हो गया। आखिर एक दिन मेरी पऋनी छत से नीचे आकर मुझसे बोली] ^पास वाले मकान की छत पर एक लड़का देखा] जरा उसे बुलाइए तो!* आखिर हमारे पड़ोस के घर में रहने वाला लड़का सुबीर बनजी़ ही ^पथेर पांचाली* में ^अपू* बना।
Section 4 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
पि़्ाफल्म का काम आगे भी ढाई साल चलने वाला है] इस बात का अंदाजा मुझे पहले नहीं था। इसलिए जैसे-जैसे दिन बीतने लगे] वैसे-वैसे मुझे डर लगने लगा। अपू और दुगा़ की भूमिका निभाने वाले बच्चे अगर जयादा बड़े हो गए] तो पि़्ाफल्म में वह दिखाई देगा! लेकिन मेरी खुश किस्मती से उस उम्र में बच्चे जितने बढ़ते हैं] उतने अपू और दुगा़ की भूमिका निभाने वाले बच्चे नहीं बढ़े। इंदिरा ठाक#न की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल उम्र की चुन्नीबाला देवी ढाई साल तक काम कर सकी] यह भी मेरे सौभाग्य की बात थी। शूटिंग की शु#आत में ही एक गड़बड़ हो गई। अपू और दुगा़ काे लेकर हम कलकटा* से सटार मील पर पालसिट नाम के एक गाँव गए। वहाँ रेल-लाइन के पास काशफूलों से भरा एक मैदान था। अपू और दुगा़ पहली बार रेलगाड़ी देखते हैं इस सीन की शूटिंग हमें करनी थी। यह सीन बहुत ही बड़ा था। एक दिन में उसकी शूटिंग पूरी होना नामुमकिन था। कम-से- कम दो दिन लग सकते थे। पहले दिन जगद्धाताी पूजा का ऋयोहार था।
Section 5 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
दुगा़ के पीछे-पीछे दौड़ते हुए अपू* वत़मान में काेलकाता पथेर पांचाली पि़्ाफल्म का एक द्श्य काशफूलों के वन में पहुँचता है। सुबह शूटिंग शु: करके शाम तक हमने सीन का आधा भाग चितिात किया। निदे़शक] छायाकार] छोटे अभिनेता-अभिनेताी हम सभी इस क्षेता में नवागत होने के कारण थोड़े बौराए हुए ही थे] बाकी का सीन बाद में चितिात करने का निण़य लेकर हम घर पहुँचे। सात दिन बाद शूटिंग के लिए उस जगह गए] तो वह जगह हम पहचान ही नहीं पाए! लगा] ये कहाँ आ गए हैं हम\ कहाँ गए वे सारे काशफूल। बीच के सात दिनों में जानवरों ने वे सारे काशफूल खा डाले थे! अब अगर हम उस जगह बाकी आधो सीन की शूटिंग करते] तो पहले आधो सीन के साथ उसका मेल वैफसे बैठता\ उसमें से ^कंटिन्युइटी* नदारद हो जाती! उस सीन के बाकी अंश की शूटिंग हमने उसके अगले साल शरद ऋतु में] जब फिर से वह मैदान काशफूलों से भर गया] तब की। उसी समय रेलगाड़ी के भी शाॉट्स लिए। लेकिन रेलगाड़ी के इतने शाॉट्स थे कि एक रेलगाड़ी से काम नहीं चला।
Section 6 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
एक के बाद एक तीन रेलगाडि़यों काे हमने शूटिंग के लिए इस्तेमाल किया। सुबह से लेकर दोपहर तक कितनी रेलगाडि़याँ उस लाइन पर से जाती हैं यह पहले ही टाइम-टेबल देखकर जान लिया था। हर एक ट्रेन एक ही दिशा से आने वाली थी। जिस स्टेशन से वे रेलगाडि़याँ आने वाली थीं] उस स्टेशन पर हमारी टीम के अनिल बाबू थे। रेलगाड़ी स्टेशन से निकलते समय अनिल बाबू भी इंजिन-ड्राइवर की केबिन में चढ़ते थे। क्योंकि गाड़ी के शूटिंग की जगह के पास आते ही बाॉयलर में काेयला डालना ज:री था] ताकि काला धाुआँ निकले। सप़्ोफद काशफूलों की प्ष्ठभूमि पर अगर काला धाुआँ नहीं आया] तो द्श्य वैफसे अच्छा लगेगा\ ^पथेर पांचाली* पि़्ाफल्म में जब यह सीन दिखाई देता है] तब दश़क पहचान नहीं पाते कि उस सीन में हमने तीन अलग-अलग रेलगाडि़यों का इस्तेमाल किया है। आज के डीजल और बिजली पर चलने वाले इंजनों के युग में वह द्श्य उस प्रकार से हम चितिात न कर पाते। आथि़क अभाव के कारण बहुत दिनों तक हमें अलग-अलग समस्याओं से जूझना पड़ा। एक उदाहरण देता हूँ।
Section 7 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
मूल उपन्यास में अपू और दुगा़ के ^भूलो* नामक पालतू कुटो का उल्लेख है। गाँव से ही हमने एक कुटा प्राप्त किया और वह भी हमसे ठीक बता़व करने लगा। पि़्ाफल्म में एक द्श्य ऐसा हैः अपू की माँ सव़जया अपू काे भात खिला रही है। भूलो कुटा दरवाजे के सामने आँगन में बैठकर अपू का भात खाना देख रहा है। अपू के हाथ में छोटे तीर-कमान हैं। खाने में उसका पूरा धयान नहीं है। वह माँ की ओर पीठ करके बैठा हुआ है। वह तीर-कमान खेलने के लिए उतावला है। अपू खाते-खाते ही कमान से तीर छोड़ता है। उसके बाद खाना छोड़कर तीर वापस लाने के लिए जाता है। सव़जया बाएँ हाथ में वह थाली और दाहिने हाथ में निवाला लेकर बच्चे के पीछे दौड़ती है] लेकिन बच्चे के भाव देखकर जान जाती है कि वह अब कुछ नहीं खाएगा। भूलो कुटा भी खड़ा हो जाता है। उसका धयान सव़जया के हाथ में जो भात की थाली है] उसकी ओर है। इसके बाद वाले शाॉट में हमें ऐसा दिखाना था कि सव़जया थाली में बचा भात एक गमले में डाल देती है] और भूलो वह भात खाता है।
Section 8 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
लेकिन यह शाॉट हम उस दिन ले नहीं सके] क्योंकि सूरज की रोशनी खऋम हुई और उसी के साथ हमारे पास जो पैसे थे] वे भी खऋम हुए! छह महीने बाद] फिर से पैसे इक_ा होने पर हम फिर बोडाल गाँव में उस सीन का बाकी अंश चितिात करने के लिए गए। लेकिन वहाँ जाने पर समाचार मिला कि भूलो कुटा अब इस दुनिया में नहीं है। अब क्या होगा\ खबर मिली कि भूलो जैसा दिखने वाला और एक कुटा गाँव में है। अब लाओ पकड़ के उस कुटो काे! सचमुच! यह कुटा भूलो जैसा ही दिखता था। वह भूलो से बहुत ही मिलता-जुलता था। उसके शरीर का रंग तो भूलो जैसा बादामी था ही] उसकी दुम का छोर भी भूलो के दुम की छोर जैसा ही सप़्ोफद था। आखिर यह पेंफका हुआ भात उसने खाया] और हमारे उस द्श्य की शूटिंग पूरी हुई। पि़् फल्म देखते समय यह बात किसी के भी धयान में नहीं आती कि एक ही सीन में हमने ^भूलो* की भूमिका में दो अलग-अलग कुटाों से काम लिया है! और सिप़्ा़फ कुटो के संदभ़ में ही नहीं] आदमी के संदभ़ से भी ऐसी ही समस्या से ^पथेर पांचाली* की शूटिंग के दौरान उलझना पड़ा था।
Section 9 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
श्रीनिवास नामक घूमते मिठाईवाले से मिठाई खरीदने के लिए अपू और दुगा़ के पास पैसे नहीं हैं। वे तो मिठाई खरीद नहीं सकते] इसलिए अपू और दुगा़ उस मिठाईवाले के पीछे-पीछे मुखजी़ के घर के पास जाते हैं। मुखजी़ अमीर आदमी हैं। वे तो मिठाई ज:र खरीदेंगे और उनका मिठाई खरीदना देखने में ही अपू और दुगा़ की खुशी है। इस द्श्य का कुछ अंश चितिात होने के बाद हमारी शूटिंग कुछ महीनों के लिए स्थगित हो गई। पैसे हाथ आने पर फिर जब हम उस गाँव में शूटिंग करने के लिए गए] तब खबर मिली कि श्रीनिवास मिठाईवाले की भूमिका जो सज्जन कर रहे थे] उनका देहांत हो गया है। अब पहले वाले श्रीनिवास का मिलता-जुलता दूसरा आदमी कहाँ से मिलेगा\ आखिर श्रीनिवास की भूमिका के लिए हमें जो सज्जन मिले] उनका चेहरा पहले वाले श्रीनिवास से मिलता-जुलता नहीं था] लेकिन शरीर से वे पहले श्रीनिवास जैसे ही थे। उन्हीं पर हमने द्श्य का बाकी अंश चितिात किया।
Section 10 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
पि़्ाफल्म में दिखाई देता है कि एक नंबर श्रीनिवास बाँसबन से बाहर आता है और अगले शाॉट में दो नंबर श्रीनिवास वैफमरे की ओर पीठ करके मुखजी़ के घर के गेट के अंदर जाता है। ^पथेर पांचाली* पि़्ाफल्म अनेक लोगों ने एक से अधिाक बार देखी है] लेकिन श्रीनिवास के मामले में यह बात किसी के धयान में आई है] ऐसा मैंने नहीं सुना! इस श्रीनिवास के सीन में ही एक शाॉट के वक्त हम बिलकुल तंग आ गए थे और वह भी उस भूलो कुटो की वजह से। छोटे से पुकुर के पार मिठाईवाला खड़ा है] और इस पार] अपने घर के पास अपू-दुगा़ मिठाईवाले की ओर लिचाई नजर से देख रहे हैं। ^क्यों] मिठाई खरीदेंगे\* मिठाईवाले के इस सवाल का वे ^ना* में जवाब देते हैं] तब मिठाईवाला मुखजी़ के घर की ओर जाने लगता है। दुगा़ अपू से कहती है] ^चल] हम भी जाएँगे।* भाई-बहन दौड़ने लगते हैं और उसी समय पीछे झुरमुट में बैठा भूलो कुटा भी छलांग लगाकर उनके साथ दौड़ने लगता है। हमें ऐसा सीन लेना था] लेकिन मुश्किल यह कि यह कुटा काेई हाॉलीवुड का सिखाया हुआ नहीं था।
Section 11 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
इसलिए यह बताना मुश्किल ही था कि वह अपू-दुगा़ के साथ भागता जाएगा या नहीं। कुटो के मालिक से हमने कहा था] ^अपू-दुगा़ जब भागने लगते हैं] तब तुम अपने कुटो काे उन दोनों के पीछे भागने के लिए कहना।* लेकिन शूटिंग के वक्त दिखाई दिया कि वह कुटा मालिक की आज्ञा का पालन नहीं कर रहा है। इधार हमारा वैफमरा चालू ही था। कीमती पि़्ाफल्म जाया हो रही थी और मुझे बार-बार चिल्लाना पड़ रहा था ^कट्! कट्!* अब यहाँ धाीरज रखने के सिवा दूसरा उपाय नहीं था। अगर कुटा बच्चों के पीछे दौड़ा] तो ही वह उनका पालतू कुटा लग सकता था। आखिर मैंने दुगा़ से अपने हाथ में थोड़ी मिठाई छिपाने के लिए कहा] और वह कुटो काे दिखाकर दौड़ने काे कहा। इस बार कुटा उनके पीछे भागा] और हमें हमारी इच्छा के अनुसार शाॉट मिला। पैसों की कमी के कारण ही बारिश का द्श्य चितिात करने में बहुत मुश्किल आई थी। बरसात के दिन आए और गए] लेकिन हमारे पास पैसे नहीं थे] इस कारण शूटिंग बंद थी।
Section 12 of 'अपू के साथ ढाई साल' by Satyajit Ray. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
Model exam answers, grammar & audio
You have read the summary. The board-ready model answers, grammar notes, one-touch audio and writing practice for this chapter are part of Lipi.
Sign in to unlockSee it, understand it, hear it read aloud, then write the exam answer with confidence, for a fraction of a tutor cost.