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CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1

घर की याद

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.

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Suryakant Tripathi Nirala

Summary

कुछ लिख के सो] कुछ पढ़ के सो तू जिस जगह जागा सबेरे] उस जगह से बढ़ के सो (भवानी प्रसाद मिश्र रचनावली) भवानी प्रसाद मिश्र चकित है दुख] बुनी हुई रस्सी] खुशबू के शिलालेख] अनाम तुम आते हो] इदं न मम्आदि पुरस्कार एवं पÁश्री से अलंकृत म्ऋयुः सन्१९८५ सहज लेखन और सहज व्यक्तिऋव का नाम है भवानी प्रसाद मिश्र। कविता और साहिऋय के साथ-साथ राष्ट्रीय आंदोलन में जिन कवियों की सक्रिय भागीदारी थी उनमें ये प्रमुख हैं। गांधाीवाद पर आस्था रखने वाले के बीच सेतु का काम किया। भवानी प्रसाद मिश्र की कविता हिंदी की सहज लय की कविता है। इस सहजता का संबंधा गांधाी के चरखे की लय से भी जुड़ता है इसीलिए उन्हें कविता का गांधाी भी कहा गया है। मिश्र जी की कविताओं में बोल-चाल के ग|ाऋमक-से लगते वाक्य-विन्यास काे ही कविता में बदल देने की अद्भुत क्षमता है। इसी कारण उनकी कविता सहज और लोक के अद्कि करीब है।

Section 1 of 'घर की याद' by Suryakant Tripathi Nirala. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

भवानी प्रसाद मिश्र जिस किसी विषाय काे उठाते हैं उसे घरेलू बना लेते हैं- आँगन का पौधा] शाम और दूर दिखती पहाड़ की नीली चोटी भी जैसे परिवार का एक अंग हो जाती है। व्द्धावस्था और म्ऋयु के प्रति भी एक आऋमीय स्वर मिलता है। उन्होंने प्रौढ़ प्रेम की कविताएँ भी लिखी हैं जिनमें उखाम Üां्गारिकता की बजाय सहजीवन के सुख-दुख और प्रेम की व्यंजना है। नई कविता के दौर के कवियों में मिश्र जी के यहाँ व्यंग्य और क्षोभ भरपूर है किंतु वह प्रतिक्रियापरक न होकर स्जनाऋमक है। गांद्ीवाद पर आस्था रखने के कारण उन्होंने अहिंसा और सहनशीलता काे रचनाऋमक अभिव्यक्ति दी है। घर की याद कविता में घर के मम़ का उद्घाटन है। कवि काे जेल-प्रवास के दौरान घर से विस्थापन की पीड़ा सालती है। कवि के स्म्ति-संसार में उसके परिजन एक-एक कर शामिल होते चले जाते हैं। घर की अवधारणा की साथ़क और मामि़क याद कविता की वेंफद्रीय संवेदना है।

Section 2 of 'घर की याद' by Suryakant Tripathi Nirala. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

आज पानी गिर रहा है] बहुत पानी गिर रहा है] रात भर गिरता रहा है] प्राण मन घिरता रहा है] बहुत पानी गिर रहा है] घर नजर में तिर रहा है] घर कि मुझसे दूर है जो] घर खुशी का पूर है जो] घर कि घर में चार भाई] मायके में बहिन आई] बहिन आई बाप के घर] हाय रे परिताप के घर! घर कि घर में सब जुड़े हैं] सब कि इतने कब जुड़े हैं] चार भाई चार बहिनें] भुजा भाई प्यार बहिनें] और माँ बिन-पढ़ी मेरी] दुःख में वह गढ़ी मेरी माँ कि जिसकी गोद में सिर] रख लिया तो दुख नहीं फिर] माँ कि जिसकी स्नेह-धारा] का यहाँ तक भी पसारा] उसे लिखना नहीं आता] जो कि उसका पता पाता।

Section 3 of 'घर की याद' by Suryakant Tripathi Nirala. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

पिता जी जिनकाे बुढ़ापा] एक क्षण भी नहीं व्यापा] जो अभी भी दौड़ जाएँ] जो अभी भी खिलखिलाएँ] मौत के आगे न हिचवेंफ] शेर के आगे न बिचवेंफ] बोल में बादल गरजता] काम में झंझा लरजता] घर की याद आज गीता पाठ करके] दंड दो सौ साठ करके] खूब मुगदर हिला लेकर] मूठ उनकी मिला लेकर] जब कि नीचे आए होंगे] नैन जल से छाए होंगे] हाय] पानी गिर रहा है] घर नजर में तिर रहा है] चार भाई चार बहिनें] भुजा भाई प्यार बहिनें] खेलते या खड़े होंगे] नजर उनकाे पड़े होंगे।

Section 4 of 'घर की याद' by Suryakant Tripathi Nirala. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

पिता जी जिनकाे बुढ़ापा] एक क्षण भी नहीं व्यापा] रो पड़े होंगे बराबर] पाँचवें का नाम लेकर] पाँचवाँ मैं हूँ अभागा] जिसे सोने पर सुहागा] पिता जी कहते रहे हैं] प्यार में बहते रहे हैं] आज उनके स्वण़ बेटे] लगे होंगे उन्हें हेटे] क्योंकि मैं उनपर सुहागा बँधा बैठा हूँ अभागा] और माँ ने कहा होगा] दुःख कितना बहा होगा] आँख में किस लिए पानी वहाँ अच्छा है भवानी वह तुम्हारा मन समझकर] और अपनापन समझकर] गया है सो ठीक ही है] यह तुम्हारी लीक ही है] पाँव जो पीछे हटाता] काेख काे मेरी लजाता] इस तरह होओ न कच्चे] रो पड़ेंगे और बच्चे] पिता जी ने कहा होगा] हाय] कितना सहा होगा] कहाँ] मैं रोता कहाँ हूँ] धाीर मैं खोता] कहाँ हूँ] हे सजीले हरे सावन] हे कि मेरे पु.य पावन] तुम बरस लो वे न बरसें] पाँचवें काे वे न तरसें] मैं मजे में हूँ सही है] घर नहीं हूँ बस यही है] किंतु यह बस बड़ा बस है] इसी बस से सब विरस है] किंतु उनसे यह न कहना] उन्हें देते द्ीर रहना] उन्हें कहना लिख रहा हूँ] उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ] काम करता हूँ कि कहना] नाम करता हूँ कि कहना] चाहते हैं लोग कहना] मत करो कुछ शोक कहना] और कहना मस्त हूँ मैं] कातने में व्यस्त हूँ मैं] वजन सटार सेर मेरा] और भोजन ढेर मेरा] कूदता हूँ] खेलता हूँ] दुःख डट कर ठेलता हूँ] और कहना मस्त हूँ मैं] यों न कहना अस्त हूँ मैं] हाय रे] ऐसा न कहना] है कि जो वैसा न कहना] कह न देना जागता हूँ] आदमी से भागता हूँ] कह न देना मौन हूँ मैं] खुद न समझूँ काैन हूँ मैं] देखना कुछ बक न देना] उन्हें काेई शक न देना] हे सजीले हरे सावन] हे कि मेरे पु.य पावन] तुम बरस लो वे न बरसें] पाँचवें काे वे न तरसें।

Section 5 of 'घर की याद' by Suryakant Tripathi Nirala. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

अभ्यास कविता के साथ १- पानी के रात भर गिरने और प्राण-मन के घिरने में परस्पर क्या संबंधा है\ २- मायके आई बहन के लिए कवि ने घर काे परिताप का घर क्यों कहा है\ ३- पिता के व्यक्तिऋव की किन विशेषाताओं काे उकेरा गया है\ ४- निम्नलिखित पंक्तियों में बस शब्द के प्रयोग की विशेषाता बताइए। मैं मजे में हूँ सही है घर नहीं हूँ बस यही है किंतु यह बस बड़ा बस है] इसी बस से सब विरस है* ५- कविता की अंतिम १२ पंक्तियों काे पढ़कर कल्पना कीजिए कि कवि अपनी किस स्थिति व मनःस्थिति काे अपने परिजनों से छिपाना चाहता है\ कविता के आस-पास १- ऐसी पाँच रचनाओं का संकलन कीजिए जिसमें प्रव्फति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के :प में की गई है। २- घर से अलग होकर आप घर काे किस तरह से याद करते हैं\ लिखें। शब्द-छवि नजर में तिर रहा है - आँखों में तैर रहा है पूर है जो - वह घर जो परिपूण़ है यानी खुशियों से भरापूरा है परिताप - अऋयधिाक दुख नवनीत - मक्खन हेटे - गौण] हीन लीक - परंपरा

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