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CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1

गजल (साये में दीप)

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.

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Dushyant Kumar

Summary

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही हो कहीं भी आग] लेकिन आग जलनी चाहिए। (साये में द्ूप) दुष्यंत कुमार घेरे] साये में द्ूप] जलते हुए वन का वसंत (काव्य)_ एक कंठ विषापायी (गीति-नाट्य) छोटे-छोटे सवाल] आँगन में एक व्क्ष और दोहरी जिंदगी (उपन्यास) म्ऋयुः सन्१९७५ दुष्यंत कुमार का साहिऋयक जीवन इलाहाबाद में आरंभ हुआ। वहाँ की साहिऋयक संस्था परिमल की गोष्ठियों में वे सक्रिय :प से भाग लेते रहे और नए पटो जैसे महऋवपूण़ पता के साथ भी जुड़े रहे। आजीविका के लिए आकाशवाणी और बाद में मधयप्रदेश के राजभाषा विभाग में काम किया। अल्पायु में ही उनका देहावसान हो गया] किंतु इस छोटे जीवन की साहिऋयक उपलब्द्यिाँ कुछ छोटी नहीं हैं। गजल की विध काे हिंदी में प्रतिष्ठित करने का श्रेय अकेले दुष्यंत काे ही जाता है। उनके कई शेर साहिऋयक एवं राजनीतिक जमावड़ों में लोकाेक्तियों की तरह दुहराए जाते हैं। साहिऋयक गुणवटा से समझौता न करते हुए भी दुष्यंत ने लोकप्रियता के नए प्रतिमान कायम किए हैं।

Section 1 of 'गजल (साये में दीप)' by Dushyant Kumar. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

एक कंठ विषापायी -शीषा़क गीतिनाट्य हिंदी साहिऋय की एक महऋवपूण़ एवं बहुप्रशंसित कृति है। यहाँ दुष्यंत की जो गजल दी गई है] वह उनके गजल संग्रह साये में द्ूप से ली गई है। गजलों में शीषा़क देने का काेई चलन नहीं है] इसीलिए यहाँ काेई शीषा़क नहीं दिया जा रहा है। गजल एक ऐसी विध है] जिसमें सभी शेर अपने-आप में मुकम्मिल और स्वतंता होते हैं। उन्हें किसी क्रम-व्यवस्था के तहत पढ़े जाने की दरकार नहीं रहती। इसके बावजूद दो चीजें ऐसी हैं] जो इन शेरों काे आपस में गूँथकर एक रचना की शक्ल देती हैं एक] :प के स्तर पर तुक का निवा़ह और दो] अंतव़स्तु के स्तर पर मिजाज का निवा़ह। जैसा कि आप देखेंगे] यहाँ पहले शेर की दोनों पंक्तियों का तुक मिलता है और उसके बाद सभी शेरों की दूसरी पंक्ति में उस तुक का निवा़ह होता है। आम तौर पर गजल के शेरों में केंद्रीय भाव का होना ज:री नहीं है लेकिन यहाँ पूरी गजल एक खास मनःस्थिति में लिखी गई जान पड़ती है।

Section 2 of 'गजल (साये में दीप)' by Dushyant Kumar. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

राजनीति और समाज में जो कुछ चल रहा है] उसे खारिज करने और विकल्प की तलाश काे मान्यता देने का भाव एक तरह से इस गजल का केंद्रीय सूता बन गया है। इस प्रकार दुष्यंत की यह गजल हिंदी गजल का सुंदर नमूना प्रस्तुत करती है। गजल कहाँ तो तय था चिरागाँ हरेकु घर के लिए] कहाँ चिराग मयस्सर नहीं शहर के लिए। यहाँ दरख्तों के साये में द्ूप लगती है] चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए। न हो कमीज तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे] ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सप़्ाफर के लिए। खुदा नहीं] न सही] आदमी का ख्वाब सही] काेई हसीन नजारा तो है नजर के लिए। वे मुतमइन हैं कि पऋथर पिघल नहीं सकता] मैं बेकरार हूँ आवाज में असर के लिए। तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की] ये एहतियात ज:री है इस बहर के लिए। जिएँ तो अपने बगीचे में गुलमोहर के तले] मरें तो गैर की गलियों में गुलमोहर के लिए। अभ्यास गजल के साथ १- आखिरी शेर में गुलमोहर की चचा़ हुई है। क्या उसका आशय एक खास तरह के फूलदार व्क्ष से है या उसमें काेई सांकेतिक अथ़ निहित है\ समझाकर लिखें।

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२- पहले शेर में चिराग शब्द एक बार बहुवचन में आया है और दूसरी बार एकवचन में। अथ़ एवं काव्य-सौंदय़ की द्ष्टि से इसका क्या महऋव है\ ३- गजल के तीसरे शेर काे गौर से पढं़े। यहाँ दुष्यंत का इशारा किस तरह के लोगों की ओर है\ ४- आशय स्पष्ट करेंः तेरा निजाम है सिल दे जुबान शायर की] ये एहतियात ज:री है इस बहर के लिए। गजल के आस-पास १- दुष्यंत की इस गजल का मिजाज बदलाव के पक्ष में है। इस कथन पर विचार करें। २- हमकाे मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल के खुश रखने काे गालिब ये खयाल अच्छा है दुष्यंत की गजल का चौथा शेर पढ़ें और बताएँ कि गालिब के उपयु़क्त शेर से वह किस तरह जुड़ता है\ शब्द-छवि मयस्सर - उपलब्द्दरख्त - पेड़ मुतमइन - इऋामीनान से] आश्वस्त बेकरार - बेचैन] आतुर निजाम - राज] शासन एहतियात - सावधनी बहर - छंद असर - प्रभाव

Section 4 of 'गजल (साये में दीप)' by Dushyant Kumar. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

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