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CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1

हे भूख! मत मचल

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.

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Trilochan

Summary

शिला पर चली शिला हुई चूर] गिरि पर चली तो गिरि में पड़ी दरार (वचन सौरभ) अक्कमहादेवी जिला शिवमोगा अंग्रेजी में स्पीकिंग ऑप़्ाफ शिवा (सं--ए- के- रामानुजन) इतिहास में वीर शैव आंदोलन से जुड़े कवियों] रचनाकारों की एक लंबी सूची है। अक्कमहादेवी इस आंदोलन से जुड़ी एक महऋवपूण़ कवयिताी थीं। चन्नमल्लिकाज़ुन देव (शिव) इनके आराधय थे। बसवन्ना और अल्लामा प्रभु इनके समकालीन कन्नड़ संत कवि थे। कन्नड़ भाषा में अक्क शब्द का अथ़ बहिन होता है। अक्कमहादेवी अपूव़ सुंदरी थीं। एक बार वहाँ का स्थानीय राजा इनका अद्भुत-अलौकिक सौंदय़ देखकर मुग्धा हो गया तथा इनसे विवाह हेतु इनके परिवार पर दबाव डाला। अक्कमहादेवी ने विवाह के लिए राजा के सामने तीन शतेएं रखीं। विवाह के बाद राजा ने उन शतोएं का पालन नहीं किया] इसलिए महादेवी ने उसी क्षण वस्ताभूषाण तथा राज-परिवार काे छोड़ दिया। पर यह ऋयाग स्ताी केवल शरीर नहीं है इसके गहरे बोद्के साथ महावीर आदि महापु#षाों के समक्ष खड़े होने का प्रयास था।

Section 1 of 'हे भूख! मत मचल' by Trilochan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

इस द्ष्टि से देखें तो मीरा की पंक्ति तन की आस कबहू नहीं कीनी ज्यों रणमाँही सूरो अक्क पर पूण़तः चरिताथ़ होती है। अक्क के कारण शैव आंदोलन से बड़ी संख्या में स्तिायाँ (जिनमें अद्किांश निचले तबकाें से थीं) जुड़ीं और अपने संघषा़ और यातना काे कविता के :प में अभिव्यक्ति दी। इस प्रकार अक्कमहादेवी की कविता पूरे भारतीय साहिऋय में इस क्रांतिकारी चेतना का पहला सज़नाऋमक दस्तावेज है और संपूण़ स्ताीवादी आंदोलन के लिए एक अजस्र प्रेरणास्रोत भी। यहाँ इनके दो वचन लिए गए हैं। दोनों वचनों का अंग्रेजी से अनुवाद केदारनाथ सिंह ने किया है। प्रथम कविता या वचन में इंद्रियों पर नियंताण का संदेश दिया गया है। यह उपदेशाऋमक न होकर प्रेम-भरा मनुहार है। दूसरा वचन एक भक्त का ईश्वर के प्रति पूण़ समप़ण है। चन्नमल्लिकाजु़न की अनन्य भक्त अक्कमहादेवी उनकी अनुकंपा के लिए हर भौतिक वस्तु से अपनी झोली खाली रखना चाहती हैं। वे ऐसी निस्प्ह स्थिति की कामना करती हैं जिससे उनका स्व या अहंकार पूरी तरह से नष्ट हो जाए। ( १ ) हे भूख!

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मत मचल प्यास] तड़प मत हे नींद ! मत सता व्रफोधा] मचा मत उथल-पुथल हे मोह ! पाश अपाने ढील लोभ] मत लिचा हे मद! मत कर मदहोश ईष्या़] जला मत ओ चराचर! मत चूक अवसर आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकाजु़न का ( २ ) हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर मँगवाओ मुझसे भीख और कुछ ऐसा करो कि भूल जाऊँ अपना घर पूरी तरह झोली पैफलाऊँ और न मिले भीख काेई हाथ बढ़ाए कुछ देने काे तो वह गिर जाए नीचे और यदि मैं झुकूँ उसे उठाने तो काेई कुटा आ जाए और उसे झपटकर छीन ले मुझसे। अभ्यास कविता के साथ १- ल{य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधाक होती हैं इसके संदभ़ में अपने तक़ दीजिए। २- ओ चराचर! मत चूक अवसर इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। ३- ईश्वर के लिए किस द्ष्टांत का प्रयोग किया गया है। ईश्वर और उसके साम्य का आधार बताइए। ४- अपना घर से क्या ताऋपय़ है\ इसे भूलने की बात क्यों कही गई है\ ५- दूसरे वचन में ईश्वर से क्या कामना की गएं है और क्यों\ कविता के आस-पास १- क्या अक्क महादेवी काे कन्नड़ की मीरा कहा जा सकता है\ चचा़ करें।

Section 3 of 'हे भूख! मत मचल' by Trilochan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

शब्द-छवि पाश - जकड़ ढील - ढीला करना मद - नशा चराचर - जड़ और चेतन चन्नमल्लिकाज़ुन - शिव

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