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CBSE Class 11 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 1

भारत माता

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 11 Hindi.

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About the author

Rajendra Yadav

Summary

सच्ची संस्कृति काे दुनिया के हर काेने से प्रेरणा मिलती है] लेकिन वह अपनी ही धारती पर पैदा होती है और उसकी जड़ें जन-मन में समाई रहती हैं। (उपसंहार] भारत की खोज) जवाहरलाल नेह: इतिहास की झलक] हिंदुस्तान की कहानी] पिता के पता पुताी के नाम (हिंदी अनुवाद)] हिंदुस्तान की समस्याएँ] स्वाधाीनता और उसके बाद] राष्ट्रपिता] भारत की बुनियादी एकता] लड़खड़ाती दुनिया आदि (लेखों और भाषाणों का संग्रह) म्ऋयुः सन्१९६४ संपन्न परिवार में हुआ। उनके पिता वहाँ के बड़े वकील थे। नेह: की प्रारंभिक शिक्षा घर पर तथा उच्च शिक्षा इंग्लैंड में हैरो तथा वैफम्ब्रिज में हुई। वहीं से वकालत की पढ़ाई भी की लेकिन नेह: पर गांधाी जी का बहुत प्रभाव पड़ा। उनकी पुकार पर वे पढ़ाई छोड़कर आजादी की लड़ाई में जुट गए। आगे चलकर सन्१९२९ में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिावेशन के अधयक्ष बने और पूण़ स्वतंताता की माँग की। नेह: का झुकाव समाजवाद की ओर भी रहा।

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सन्१९४७ में जब भारत स्वतंता हुआ तो नेह: जी पहले प्रधनमंताी बने और भारत के निमा़ण में अंत तक जुटे रहे। उन्होंने देश के विकास के लिए कई योजनाएँ बनाएं] जिनमें आथि़क और औ|ोगिक प्रगति तथा वैज्ञानिक अनुसंधन से लेकर साहिऋय] कला] संस्कृति आदि क्षेता शामिल थे। नेह: जी बच्चों के बीच चाचा नेह: के :प में जाने जाते थे। शांति] अहिंसा और मानवता के हिमायती नेह: ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वशांति और पंचशील के सिद्धांतों का प्रचार किया। प्रस्तुत पाठ हिंदुस्तान की कहानी का पाँचवाँ अधयाय है। अंग्रेजी से भाषांतर हरिभाऊ उपाधयाय ने किया है। इसमें पं- नेह: ने बताया है कि किस तरह देश के काेने-काेने में आयोजित जलसों में जाकर वे आम लोगों काे बताते थे कि अनेक हिस्सों में बँटा होने के बाद भी हिंदुस्तान एक है। इस अपार पैफलाव के बीच एकता के क्या आधार हैं और क्यों भारत एक देश है] जिसके सभी हिस्सों की नियति एक ही तरीके से बनती-बिगड़ती है– यही पूरे पाठ की विषायवस्तु है।

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इसी क्रम में पं- नेह: ने भारत माता शब्द पर भी विचार किया है और उनका निष्कषा़ है कि भारत माता की जय का मतलब है] यहाँ के करोड़ों-करोड़ लोगों की जय। कहने की ज:रत नहीं कि अपने छोटे आकार के बावजाूद इस लेख का कथ्य अऋयंत विराट और प्रस्तुतीकरण पैना है। जवाहरलाल नेह:द्१०२ भारत माता अकसर जब मैं एक जलसे से दूसरे जलसे में जाता होता] और इस तरह चक्कर काटता रहता होता था] तो इन जलसों में मैं अपने सुनने वालों से अपने इस हिंदुस्तान या भारत की चचा़ करता। भारत एक संस्कृत शब्द है और इस जाति के परंपरागत संस्थापक के नाम से निकला हुआ है। मैं शहरों में ऐसा बहुत कम करता] क्योंकि वहाँ के सुनने वाले कुछ जयादा सयाने थे और उन्हें दूसरे ही किस्म की गिजा की ज:रत थी। लेकिन किसानों से] जिनका नजरिया महदूद था] मैं इस बड़े देश की चचा़ करता] जिसकी आजादी के लिए हम लोग काेशिश कर रहे थे और बताता कि किस तरह देश का एक हिस्सा दूसरे से जाुदा होते हुए भी हिंदुस्तान एक था।

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मैं उन मसलों का जिक्र करता] जो उटार से लेकर दक्खिन तक और पूरब से लेकर पच्छिम तक] किसानों के लिए यक-साँ थे] और स्वराज्य का भी जिक्र करता] जो थोड़े लोगों के लिए नहीं] बल्कि सभी के प़्ाफायदे के लिए हो सकता था। मैं उटार-पच्छिम में खैबर के दरे़ से लेकर धाुर दक्खिन में कन्याकुमारी तक की अपनी याता का हाल बताता और यह कहता कि सभी जगह किसान मुझसे एक-से सवाल करते] क्योंकि उनकी तकलीप़्ोंफ एक-सी थीं यानी गरीबों] कज़दाराें] पँूजीपतियों के शिकंजे] जमींदार] महाजन] कड़े लगान और सूद] पुलिस के जुल्म] और ये सभी बातें गुँथी हुई थीं] उस ढप्े के साथ] जिसे एक विदेशी सरकार ने हम पर लाद रखा था और इनसे छुटकारा भी सभी काे हासिल करना था। मैंने इस बात की काेशिश की कि लोग सारे हिंदुस्तान के बारे में सोचें और कुछ हद तक इस बड़ी दुनिया के बारे में भी] जिसके हम एक जुज हैं। मैं अपनी बातचीत में चीन] स्पेन] अबीसिनिया] मधय यूरोप] मिÏ और पच्छिमी एशिया में होनेवाले कशमकशों का जिक्र भी ले आता।

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मैं उन्हें सोवियत यूनियन में होने वाली अचरज-भरी तब्दीलियों का हाल भी बताता और कहता कि अमरीका ने वैफसी तरक्की की है। यह काम आसान न था] लेकिन जैसा मैंने समझ रखा था] वैसा मुश्किल भी न था। इसकी वजह यह थी कि हमारे पुराने महाकाव्यों ने और पुराणों की कथा-कहानियों ने] जिन्हें वे खूब जानते थे] उन्हें इस देश की कल्पना करा दी थी] और हमेशा कुछ लोग ऐसे मिल जाते थे] जिन्होंने हमारे बड़े-बड़े तीथोएं की याता कर रखी थी] जो हिंदुस्तान के चाराें काेनों पर हैं। या हमें पुराने सिपाही मिल जाते] जिन्होंने पिछली बड़ी जंग में या और धावों के सिलसिले में विदेशों में नौकरियाँ की थीं। सन्तीस के बाद जो आथि़क मंदी पैदा हुई थी] उसकी वजह से दूसरे मुल्काें के बारे में मेरे हवाले उनकी समझ में आ जाते थे। कभी ऐसा भी होता कि जब मैं किसी जलसे में पहुँचता] तो मेरा स्वागत “भारत माता की जय!, इस नारे से जोर के साथ किया जाता। मैं लोगों से अचानक पूछ बैठता कि इस नारे से उनका क्या मतलब है\ यह भारत माता काैन है] जिसकी वे जय चाहते हैं।

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मेरे सवाल से उन्हें कुतूहल और ताज्जाुब होता और कुछ जवाब न बन पड़ने पर वे एक-दूसरे की तरप़्ाफ या मेरी तरप़् फ देखने लग जाते। मैं सवाल करता ही रहता। आखिर एक ह^े-क^े जाट ने] जो अनगिनत पीढि़यों से किसानी करता आया था] जवाब दिया कि भारत माता से उनका मतलब धारती से है। काैन-सी धारती\ खास उनके गाँव की धारती या जिले की या सूबे की या सारे हिंदुस्तान की धारती से उनका मतलब है\ इस तरह सवाल-जवाब चलते रहते] यहाँ तक कि वे ऊबकर मुझसे कहने लगते कि मैं ही बताऊँ। मैं इसकी काेशिश करता और बताता कि हिंदुस्तान वह सब कुछ है] जिसे उन्होंने समझ रखा है] लेकिन वह इससे भी बहुत जयादा है। हिंदुस्तान के नदी और पहाड़] जंगल और खेत] जो हमें अन्न देते हैं] ये सभी हमें अजीज हैं। लेकिन आखिरकार जिनकी गिनती है] वे हैं हिंदुस्तान के लोग] उनके और मेरे जैसे लोग] जो इस सारे देश में पैफले हुए हैं। भारत माता दरअसल यही करोड़ों लोग हैं] और “भारत माता की जय!, से मतलब हुआ इन लोगों की जय का।

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मैं उनसे कहता कि तुम इस भारत माता के अंश हो] एक तरह से तुम ही भारत माता हो] और जैसे-जैसे ये विचार उनके मन में बैठते] उनकी आँखों में चमक आ जाती] इस तरह] मानो उन्होंने काेई बड़ी खोज कर ली हो। अभ्यास पाठ के साथ १- भारत की चचा़ नेह: जी कब और किससे करते थे\ २- नेह: जी भारत के सभी किसानों से काैन-सा प्रश्न बार-बार करते थे\ ३- दुनिया के बारे में किसानों काे बताना नेह: जी के लिए क्यों आसान था\ ४- किसान सामान्यतः भारत माता का क्या अथ़ लेते थे\ ५- भारत माता के प्रति नेह: जी की क्या अवधरणा थी\ ६- आजादी से पूव़ किसानों काे किन समस्याओं का सामना करना पड़ता था\ पाठ के आस-पास १- आजादी से पहले भारत-निमा़ण काे लेकर नेह: के क्या सपने थे\ क्या आजादी के बाद वे साकार हुए\ चचा़ कीजिए। २- भारत के विकास काे लेकर आप क्या सपने देखते हैं\ ३- आपकी द्ष्टि में भारत माता और हिंदुस्तान की क्या संकल्पना है\ बताइए।

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४- वत़मान समय में किसानों की स्थिति किस सीमा तक बदली है\ चचा़ कर लिखिए\ ५- आजादी से पूव़ अनेक नारे प्रचलित थे। किन्हीं दस नाराें कुा संकलन करें और संदभ़ भी लिखें। भाषा की बात १- नीचे दिए गए वाक्यों का पाठ के संदभ़ में अथ़ लिखिए - दक्खिन] पच्छिम] यक-साँ] एक जुज] ढप्े २- नीचे दिए गए संज्ञा शब्दों के विशेषाण :प लिखिए आजादी] चमक] हिंदुस्तान] विदेश] सरकार] याता] पुराण] भारत शब्द-छवि सयाने - समझदार गिजा - खुराक] भोजन] खा| नजरिया - द्ष्टिकाेण महदूद - सीमित मसला - मुखा यक-साँ - एक समान ढप्े - बोझ तब्दीलियों - परिवत़नों कशमकश - उफहापोह] पसोपेश हवाले - संदभ़ कुतूहल - उऋसुकता ताज्जुब - आश्चय़ ह^े-क^े - त्रष्ट-पुष्ट] स्वस्थ] मजबूत कद-काठी वाला अजीज - प्रिय दरअसल - वास्तव में जलसा - समाराेह धावा - आक्रमण

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