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CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2

रुबाइयाँ

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 12 Hindi.

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Firaq Gorakhpuri

Summary

फिराक गोरखपुरीफिराक गोरखपुरीफिराक गोरखपुरीफिराक गोरखपुरीफिराक गोरखपुरी मूल नामः रघुपति सहाय ^पि़्ाफराक* शिक्षा ः रामव्फष्ण की कहानियों से शुरफआत] बाद की शिक्षा अरबी] प़् फारसी और अंग्रेजी में। १९१७ में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित] पर स्वराज आंदोलन के लिए १९१८ में पद-ऋयाग। १९२० में स्वाद्ीनता आंदोलन में हिस्सेदारी के कारण डेढ़ वषा़ की जेल। इलाहाबाद विश्वि|ालय के अंग्रेजी विभाग में अधयापक रहे। ज्ञानपीठ पुरस्कार और सोवियत लैंड नेह: अवाड़ महटवपूण़ व्फतियाँ ः गुले-नग्मा] बजमे जिंदगीः रंगे-शायरी] उद़ू गजलगोई निधानः सन्१९८३ अब तुमसे रफखसत होता हूँ आओ सँभालो साजे-गजल @ नए तराने छेड़ो @ मेरे नग्मों काे नींद आती है उदू़ शायरी का बड़ा हिस्सा रफमानियत] रहस्य और शास्ताीयता से बँध रहा है जिसमें लोकजीवन और प्रव्फति के पक्ष बहुत कम उभर पाए हैं। नजीर अकबराबादी] इल्ताप़्ाफ हुसैन हाली जैसे जिन कुछ शायरों ने इस रिवायत काे तोड़ा है] उनमें एक प्रमुख नाम पि़्ाफराक गोरखपुरी का भी है।

Section 1 of 'रुबाइयाँ' by Firaq Gorakhpuri. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

पि़् फराक ने परंपरागत भावबोद्और शब्द-भंडार का उपयोग करते हुए उसे नयी भाषा और नए विषायों से जोड़ा। उनके यहाँ सामाजिक दुख-दद़ व्यक्तिगत अनुभूति बनकर शायरी में ढला है। इंसान के हाथों इंसान पर जो गुजरती है उसकी तल्ख सच्चाई और आने वाले कल के प्रति एक उम्मीद] दोनों काे भारतीय संस्व्फति और लोकभाषा के प्रतीकाें से जोड़कर पि़्ाफराक ने अपनी शायरी का अनूठा महल खड़ा किया। उदू़ शायरी अपने लाक्षणिक प्रयोगों और चुस्त मुहावरेदारी के लिए विख्यात है। शेर लिखे नहीं जाते] कहे जाते हैं। यानी एक तरह ़़़़़ का संवाद प्रमुख होता है। मीर और गालिब की तरह पि़्ाफराक ने भी कहने की इस शैली काे साद्कर आम-आदमी या साधरण-जन से अपनी बात कही है। प्रव्फति] मौसम और भौतिक जगत के सौंदय़ काे शायरी का विषाय बनाते हुए कहा] “दिव्यता भौतिकता से प्थकु वस्तु नहीं है। जिसे हम भौतिक कहते हैं वही दिव्य भी है।, पि़्ाफराक की #बाई में हिंदी का एक घरेलू :प दिखता है। भाषा सहज और प्रसंग भी सूरदास के वाऋसल्य वण़न की सादगी की याद दिलाता है।

Section 2 of 'रुबाइयाँ' by Firaq Gorakhpuri. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

मुझे चाँद चाहिए] मैया री] मैं चंद्र खिलौना लैहों जैसे बिंब आज भी उन बच्चों के लिए एक मनलुभावन खिलौना है जो वातानुकूलित कमरों में बंद नहीं रहते] छत पर चटाई बिछाकर सोते हैं तथा चंदामामा के नदिया किनारे उतरने और कल्पित दूधा-भात खाने की कल्पना से निहाल हैं। मामा भी तो एक साक्षात खिलौना है बच्चों का खासकर उन बच्चों का जिनके जीवन में महँगे खिलौने भले न हों पर जो चंद्राभ रिश्तों का मम़ समझते हैं! एक कठिन दौर है यह घर लौट बहुत रोए माँ-बाप अकेले में] मि^ी के खिलौने भी सस्ते न थे मेले में लोका देना] घुटनियों में लेकर कपड़े पिन्हाना] गेसुओं में कंघी करना] :पवती मुखड़ा] नम़ दमक] जिदयाया बालक] रस की पुतली ये कुछ विलक्षण प्रयोग हैं] हिंदी] उद़ू और लोकभाषा के अनूठे गठबंधान के जिसे गांधाी जी हिंदुस्तानी के :प में पल्लवित करना चाहते थे। माँ हाथ में आईना देकर बच्चे काे बहला रही है “देख] आईने में चाँद उतर आया है।, चाँद की परछाएं भी चाँद ही है। कल्पना की आँख का भला क्या मुकाबला।

Section 3 of 'रुबाइयाँ' by Firaq Gorakhpuri. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

“:पवती मुखड़े पै नम़ दमक, लाने के लिए छठे-छमासे] पव़-ऋयोहार पर ही सही] कुछ नन्हीं प़्ाफरमाइशें भी पूरी कर दी जाती हैं दीवाली में चीनी-मि^ी के खिलौने] राखी में ^बिजली की तरह चमक रहे लच्छे*। रक्षाबंधान एक मीठा बंधान है। रक्षाबंधान के कच्चे धागों पर बिजली के लच्छे हैं। सावन में रक्षाबंधान आता है। सावन का जो संबंधा झीनी घटा से है] घटा का जो संबंधा बिजली से] वही संबंधा भाई का बहन से।

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#बाइयाँ #बाइयाँ#बाइयाँ #बाइयाँ#बाइयाँ आँगन में लिए चाँद के टुकड़े काे खड़ी हाथों पे झुलाती है उसे गोद-भरी रह-रह के हवा में जो लोका देती है गूँज उठती है खिलखिलाते बच्चे की हँसी नहला के छलके-छलके निम़ल जल से उलझे हुए गेसुओं में कंघी करके किस प्यार से देखता है बच्चा मुँह काे जब घुटनियों में ले के है पिन्हाती कपडे़ दीवाली की शाम घर पुते और सजे चीनी के खिलौने जगमगाते लावे वो :पवती मुखड़े पै इक नम़ दमक बच्चे के घरौंदे में जलाती है दिए आँगन में ठुनक रहा है जिदयाया है बालक तो हई चाँद पै लिचाया है दप़ण उसे दे के कह रही है माँ देख आईने में चाँद उतर आया है रक्षाबंधान की सुबह रस की पुतली छायी है घटा गिन की हलकी-हलकी बिजली की तरह चमक रहे हैं लच्छे भाई के है बाँधाती चमकती राखी द्बपतबसम६रफबाई उदू़ और प़्ाफारसी का एक छंद या लेखन शैली है] जिसमें चार पंक्तियाँ होती हैं।

Section 5 of 'रुबाइयाँ' by Firaq Gorakhpuri. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

इसकी पहली] दूसरी और चौथी पंक्ति में तुक (कापि़् फया) मिलाया जाता है तथा तीसरी पंक्ति स्वच्छंद होती है। अभ्यास अभ्यासअभ्यास अभ्यासअभ्यास पाठ के साथ १- शायर राखी के लच्छे काे बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है\ २- खुद का परदा खोलने से क्या आशय है\ टिप्पणी करें (क) गोदी के चाँद और गिन के चाँद का रिश्ता। (ख) सावन की घटाएँ व रक्षाबंधान का पव़। कविता के आसपास १- इन रफबाइयों से हिंदी] उदू़ और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों काे छाँटिए। आपसदारी कविता में एक भाव] एक विचार होते हुए भी उसका अंदाजे बयाँ या भाषा के साथ उसका बता़व अलग-अलग :प में अभिव्यक्ति पाता है। इस बात काे धयान रखते हुए नीचे दी गई कविताओं काे पढि़ए और दी गई रफबाई में से समानाथी़ पंक्तियाँ ढूँढि़ए। (क) मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों।

Section 6 of 'रुबाइयाँ' by Firaq Gorakhpuri. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

सूरदास (ख) वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा गान उमड़ कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान सुमितानंदन पंत (ग) सीस उतारे भुएं धारे तब मिलिहैं करतार कबीर #बाइयाँ शब्द-छवि लोका देना - उछाल-उछाल कर प्यार करने की एक क्रिया हई - है ही शब - रात

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