CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2
कैमरे में बंद अपाहिज
Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 12 Hindi.
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Raghuvir Sahay
Summary
रघुवीर सहायरघुवीर सहायरघुवीर सहायरघुवीर सहायरघुवीर सहाय आरंभिक कविताएँ] महटवपूण़ काव्य-संकलन सीढि़यों पर धाूप में] आऋमहऋया के विरफद्ध] हँसो-हँसो जल्दी हँसो पताकारिता ः ऑल इंडिया रेडियो के हिंदी समाचार विभाग से संबद्ध रहे] फिर हैदराबाद से निकलने वाली पतिाका कल्पना और उसके बाद दैनिक नवभारत टाइम्स तथा दिनमान से संबद्ध रहे निधानः सन्१९९०] दिल्ली में कुछ होगा @ कुछ होगा अगर मैं बोलूगाँ @ न टूटे न टूटे तिलिस्म सटा का @ मेरे अंदर एक कायर टूटेगा रघुवीर सहाय समकालीन हिंदी कविता के संवेदनशील ^नागर* चेहरा हैं। सड़क] चौराहा] दुक़तर] अखबार] संसद] बस] रेल और बाजार की बेलौस भाषा में उन्होंने कविता लिखी। घर-मुहल्ले के चरिताों पर कविता लिखकर इन्हें हमारी चेतना का स्थायी नागरिक बनाया। हऋया-लूटपाट और आगजनी] राजनैतिक भ्रष्टाचार और छल-छद्म इनकी कविता में उतरकर खोजी पताकारिता की सनसनीखेज रपटें नहीं रह जाते] आऋमान्वेषाण का माधयम बन जाते हैं।
Section 1 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
यह ठीक है कि पेशे से वे पताकार थे] लेकिन वे सिप़्ा़फ पताकार ही नहीं ] सिद्ध कथाकार और कवि भी थे। कविता काे उन्होंने एक कहानीपन और एक नाटकीय वैभव दिया। जातीय या वैयक्तिक स्म्तियाँ उनके यहाँ नहीं के बराबर हैं। इसलिए उनके दोनों पाँव वत़मान में ही गड़े हैं। बावजूद इसके] मामि़क उजास और व्यंग्य-बुझी खुरदरी मुसाकानों से उनकी कविता पटी पड़ी है। छंदानुशासन के लिहाज से भी वे अनुपम हैं पर जयादातर बातचीत की सहज शैली में ही उन्होंने लिखा और बखूबी लिखा। बऋाौर पताकार और कवि घटनाओं में निहित विडंबना और तासदी काे भी उन्होंने देखा। रघुवीर सहाय की कविताओं की दूसरी विशेषाता है छोटे या लघु की महटा का स्वीकार। वे महज बड़े कहे जाने वाले विषायों या समस्याओं पर ही द्ष्टि नहीं डालते] बल्कि जिनकाे समाज में हाशिए पर रखा जाता है] उनके अनुभवों काे भी अपनी रचनाओं का विषाय बनाते हैं। रघुवीर जी ने भारतीय समाज में ताकतवरों की बढ़ती हैसियत और सटा के खिलाप़्ाफ भी साहिऋय और पताकारिता के पाठकाें का धयान खींचा।
Section 2 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
^रामदास* नाम की उनकी कविता आधाुनिक हिंदी कविता की एक महटवपूण़ रचना मानी जाती है। अऋयंत साधारण और अनायास-सी प्रतीत होनेवाली शैली में समाज की दारफण विडंबनाओं काे पकड़ने की जो कला रघुवीर सहाय की कविताओं में मिलती है] उसका प्रतिनिधिा उदाहरण है यहाँ प्रस्तुत कविता वैफमरे में बंद अपाहिज जो लोग भूल गये हैं संग्रह से ली गई है। शारीरिक चुनौती काे झेलते व्यक्ति से टेलीविजन-वैफमरे के सामने किस तरह के सवाल पूछे जाएँगे और काय़क्रम काे सफल बनाने के लिए उससे वैफसी भंगिमा की अपेक्षा की जाएगी इसका लगभग सपाट तरीके से बयान करते हुए कवि ने एक तरह से पीड़ा के साथ द्श्य-संचार माधयम के संबंधा काे रेखांकित किया है। किसी की पीड़ा काे बहुत बड़े दश़क वग़ तक पहुँचाने वाले व्यक्ति काे उस पीड़ा के प्रति स्वयं संवेदनशील होने और दूसरों काे संवेदनशील बनाने का दावेदार होना चाहिए। लेकिन विडंबना यह है कि आप जब पीड़ा काे पदे़ पर उभारने का प्रयास करते हैं] तब कारोबारी दबाव के तहत आपका रवैया संवेदनहीन हो जाता है।
Section 3 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
सहाय जी की यह कविता टेलीविजन स्टूडियो के भीतर की दुनिया काे उभारती ज:र है] लेकिन यह आवश्यक नहीं है कि इसे सिप़्ा़फ टेलीविजन माधयम से जोड़कर देखा जाए। अपनी व्यंजना में यह कविता हर ऐसे व्यक्ति की ओर इशारा करती है] जो दुख-दद़] यातना-वेदना काे बेचना चाहता है। इस कविता काे शारीरिक चुनौती झेलते लोगों के प्रति संवेदनशील नजरिया अपनाने के लिए प्रेरित करते पाठ के :प में भी देखा जा सकता है। इसके लिए कवि ने धाुर संवेदनहीनता काे रेखांकित करने का तरीका अपनाया है। वह दिखलाता है कि किस तरह करफणा जगाने के मकसद से शु: हुआ काय़क्रम क्रूर बन जाता है।
Section 4 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
कैमरे में बंद अपाहिज क कक ककैै ैमरे में बंद अपाहिजमरे में बंद अपाहिजमरे में बंद अपाहिजमरे में बंद अपाहिजमरे में बंद अपाहिज हम दूरदश़न पर बोलेंगे हम समथ़ शक्तिवान हम एक दुब़ल काे लाएँगे एक बंद कमरे में उससे पूछेंगे तो आप क्या अपाहिज हैं\ तो आप क्यों अपाहिज हैं\ आपका अपाहिजपन तो दुख देता होगा देता है\ (वैफमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा) हाँ तो बताइए आपका दुख क्या है जल्दी बताइए वह दुख बताइए बता नहीं पाएगा सोचिए बताइए आपकाे अपाहिज होकर वैफसा लगता है वैफसा यानी वैफसा लगता है (हम खुद इशारे से बताएँगे कि क्या ऐसा\) सोचिए बताइए थोड़ी काेशिश करिए (यह अवसर खो देंगे\) आप जानते हैं कि काय़क्रम रोचक बनाने के वास्ते हम पूछ-पूछकर उसकाे रफला देंगे इंतजार करते हैं आप भी उसके रो पड़ने का करते हैं\ (यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा) फिर हम परदे पर दिखलाएँगे फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर बहुत बड़ी तसवीर और उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी (आशा है आप उसे उसकी अपंगता की पीड़ा मानेंगे) एक और काेशिश दश़क धाीरज रखिए देखिए हमें दोनों एक संग रफलाने हैं कैमरे में बंद अपाहिज आप और वह दोनों (वैफमरा बस करो नहीं हुआ रहने दो परदे पर वक्ऋा की कीमत है) अब मुसाकुराएँगे हम आप देख रहे थे सामाजिक उखेश्य से युक्त काय़क्रम (बस थोड़ी ही कसर रह गई) धान्यवाद।
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अभ्यास अभ्यासअभ्यासअभ्यासअभ्यास कविता के साथ १- कविता में कुछ पंक्तियाँ काेष्ठकाें में रखी गई हैं आपकी समझ से इसका क्या औचिऋय है\ २- वैफमरे में बंद अपाहिज करफणा के मुखौटे में छिपी क्रूरता की कविता है विचार कीजिए। ३- हम समथ़ शक्तिवान और हम एक दुब़ल काे लाएँगे पंक्ति के माधयम से कवि ने क्या व्यंग्य किया है\ ४- यदि शारीरिक :प से चुनौती का सामना कर रहे व्यक्ति और दश़क] दोनों एक साथ रोने लगेंगे] तो उससे प्रश्नकता़ का काैन-सा उखेश्य पूरा होगा\ ५- परदे पर वक्त की कीमत है कहकर कवि ने पूरे साक्षाऋकार के प्रति अपना नजरिया किस :प में रखा है\ कविता के आसपास १- यदि आपकाे शारीरिक चुनौती का सामना कर रहे किसी मिता का परिचय लोगों से करवाना हो] तो किन शब्दों में करवाएँगी\ २- सामाजिक उखेश्य से युक्त ऐसे काय़क्रम काे देखकर आपकाे वैफसा लगेगा\ अपने विचार संक्षेप में लिखें। ३- यदि आप इस काय़क्रम के दश़क हैं तो टी-वी- पर ऐसे सामाजिक काय़क्रम काे देखकर एक पता में अपनी प्रतिक्रिया दूरदश़न निदेशक काे भेजें।
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४- नीचे दिए गए खबर के अंश काे पढि़ए और बिहार के इस बुधिाया से एक काल्पनिक साक्षाऋकार कीजिए उम्र पाँच साल] संपूण़ :प से विकलांग और दौड़ गया पाँच किलोमीटर। सुनने में थोड़ा अजीब लगता है] लेकिन यह कारनामा कर दिखाया है पवन दोनों हाथ का पुलवा नहीं है] जबकि पैर में सिप़्ा़फ एड़ी ही है। पवन ने रविवार काे पटना के कारगिल चौक से सुबह ८-४० पर दौड़ना शु: किया। डाकबंगला रोड] तारामंडल और आर ब्लाक होते हुए पवन का सप़्ाफर एक घंटे बाद शहीद स्मारक पर जाकर खऋम हुआ। पवन }ारा तय की गई इस दूरी के दौरान ^उम्मीद स्कूल* के तकरीबन तीन सौ बच्चे साथ दौड़ कर उसका हौसला बढ़ा रहे थे। सड़क किनारे खड़े दश़क यह देखकर हतप्रभ थे कि किस तरह एक विकलांग बच्चा जोश एवं उऋसाह के साथ दौड़ता चला जा रहा है। जहानाबाद जिले का रहने वाला पवन नवरसना एकेडमी] बेउर में कक्षा एक का छाता है। असल में पवन का सपना उड़ीसा के बुधिाया जैसा करतब दिखाने का है। कुछ माह पूव़ बुधिाया ६५ किलोमीटर दौड़ चुका है।
Section 7 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
लेकिन बुधिाया पूरी तरह से स्वस्थ है जबकि पवन पूरी तरह से विकलांग। पवन का सपना कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी पैदल तय करने का है। ९ अक्तूबर] २००६ हिंदुस्तान से साभार
Section 8 of 'कैमरे में बंद अपाहिज' by Raghuvir Sahay. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
Model exam answers, grammar & audio
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