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CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2

छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख

Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 12 Hindi.

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Umashankar Joshi

Summary

उमाशंकर जोशीउमाशंकर जोशीउमाशंकर जोशीउमाशंकर जोशीउमाशंकर जोशी आतिथ्य] वसंत वषा़] महाप्रस्थान] अभिज्ञा (एकांकी)_ सापनाभारा] शहीद (कहानी)_ श्रावणी मेणो] विसामो (उपन्यास)_ पारकांज.या (निबंधा)_ गोष्ठी] उघाड़ीबारी] क्लांतकवि] म्हारासाॉनेट] स्वप्नप्रयाण (संपादन) सन्१९४७ से संस्व्फति पतिाका का संपादन निद्नः सन्१९८८ तंग आ गया हूँ @ बड़ों की अल्पता से @ जी रहा हूँ @ देख कर छोटों की बड़ाई बीसवीं सदी की गुजराती कविता और साहिऋय काे नयी भंगिमा और नया स्वर देनेवाले उमाशंकर जोशी का साहिऋयक अवदान पूरे भारतीय साहिऋय के लिए भी महटवपूण़ है। उनकाे परंपरा का गहरा ज्ञान था। कालिदास के अभिज्ञान शावुंफतलम्और भवभूति के उटाररामचरित का उन्होंने गुजराती में अनुवाद किया। ऐसे अनुवाद गुजराती साहिऋय की अभिव्यक्ति क्षमता काे बढ़ाने वाले थे। बतौर कवि उमाशंकर जी ने गुजराती कविता काे प्रव्फति से जोड़ा] आम जिंदगी के अनुभव से परिचित कराया और नयी शैली दी।

Section 1 of 'छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख' by Umashankar Joshi. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

जीवन के सामान्य प्रसंगों पर सामान्य बोलचाल की भाषा में कविता लिखने वाले भारतीय आधाुनिकतावादियों में अन्यतम हैं जोशी जी। कविता के साथ-साथ साहिऋय की दूसरी विधाओं में भी उनका योगदान बहुमूल्य है] खासकर साहिऋय की आलोचना में। निबंधाकार के :प में गुजराती साहिऋय में बेजोड़ माने जाते हंै। उमाशंकर जोशी उन साहिऋयक व्यक्तिऋव में हैंे जिनका भारत की आजादी की लड़ाई से रिश्ता रहा। आजादी की लड़ाई के दौरान वे जेल भी गए। छोटा मेरा खेत@बगुलांे क पंखे यहाँ प्रस्तुत कविता छोटा मेरा खेत खेती के :पक में कवि-कम़ के हर चरण काे बाँधाने की काेशिश के :प में पढ़ी जा सकती है। कागज का पन्ना] जिस पर रचना शब्दबद्ध होती है] कवि काे एक चौकाेर खेत की तरह लगता है। इस खेत में किसी अंधाड़ (आशय भावनाऋमक आँधाी से होगा) के प्रभाव से किसी क्षण एक बीज बोया जाता है। यह बीज-रचना विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है। यह मूल :प कल्पना का सहारा लेकर विकसित होता है और इस प्रक्रिया में स्वयं विगलित हो जाता है।

Section 2 of 'छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख' by Umashankar Joshi. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

उससे शब्दों के अंकुर निकलते हैं और अंतिः व्फति एक पूण़ स्व:प ग्रहण करती है] जो व्फषिा-कम़ के लिहाज से पुष्पित-पल्लवित होने की स्थिति है। साहिऋयक व्फति से जो अलौकिक रस-धारा फूटती है] वह क्षण में होने वाली रोपाई का ही परिणाम है। पर यह रस-धारा अनंत काल तक चलने वाली कटाई (उटाम साहिऋय कालजयी होता है और असंख्य पाठकाें }ारा असंख्य बार पढ़ा जाता है) से भी कम नहीं होती है। खेत में पैदा होने वाला अÂ कुछ समय के बाद समाप्त हो जाता है] किंतु साहिऋय का रस कभी चुकता नहीं। बगुलों के पंख कविता एक सुंदर द्श्य की कविता है। सौंदय़ का अपेक्षित प्रभाव उऋपÂ करने के लिए कवियों ने कई युक्तियाँ अपनाई हैं] जिसमें से सबसे प्रचलित युक्ति है सौंदय़ के ब्यौरों के चिताऋमक वण़न के साथ अपने मन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का वण़न। वस्तुगत और आऋमगत के संयोग की यह युक्ति पाठक काे उस मूल सौंदय़ के काप़्ाफी निकट ले जाती है। जोशी जी की इस कविता में ऐसा ही है।

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कवि काले बादलों से भरे आकाश में पंक्ति बनाकर उड़ते सप़्ोफद बगुलों काे देखता है। वे कजरारे बादलों के उफपर तैरती साँझ की श्वेत काया के समान प्रतीत होेते हैं। यह द्श्य इतना नयनाभिराम है कि कवि और सब कुछ भूलकर उसी में अटका-सा रह जाता है। वह इस माया से अपने काे बचाने की गुहार लगाता है। क्या यह सौंदय़ से बाँधाने और बिंधाने की चरम स्थिति काे व्यक्त करने का एक तरीका है\ प्रस्तुत दोनों कविताओं का गुजराती से हिंदी :पांतरण रघुवीर चौद्री और भोलाभाई पटेल ने किया है। उमाशंकर जोशी छोटा मेरा खेतछोटा मेरा खेतछोटा मेरा खेतछोटा मेरा खेतछोटा मेरा खेत छोटा मेरा खेत चौकाेना कागज का एक पÂा] काेई अंधाड़ कहीं से आया क्षण का बीज वहाँ बोया गया। कल्पना के रसायनों काे पी बीज गल गया निःशेषा_ शब्द के अंकुर फूटे] पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेषा। झूमने लगे फल] रस अलौकिक] अम्त धाराएँ फूटतीं रोपाई क्षण की] कटाई अनंतता की लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती। रस का अक्षय पाता सदा का छोटा मेरा खेत चौकाेना।

Section 4 of 'छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख' by Umashankar Joshi. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.

छोटा मेरा खेत@बगुलांे क पंखे ेेेबगुलों क पंखबगुलों क पंखबगुलों क पंखबगुलों क पंखबगुलों क पंख नभ में पाँती-बँधो बगुलों के पंख] चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें। कजरारे बादलों की छाई नभ छाया] तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया। हौले हौले जाती मुझे बाँधा निज माया से। उसे काेई तनिक रोक रक्खो। वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखें नभ में पाँती-बँधाी बगुलों की पाँखें। अभ्यास अभ्यासअभ्यास अभ्यासअभ्यास कविता के साथ १- छोटे चौकाेने खेत काे कागज का पन्ना कहने में क्या अथ़ निहित है\ २- रचना के संदभ़ में अंधाड़ और बीज क्या हैं\ ३- रस का अक्षयपाता से कवि ने रचनाकम़ की किन विशेषाताओं की ओर इंगित किया है\ ४- व्याख्या करें- १- शब्द के अंकुर फूटे] पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेषा। २- रोपाई क्षण की] कटाई अनंतता की लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।

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कविता के आसपास १- शब्दों के माधयम से जब कवि द्श्यों] चिताों] धवनि-योजना अथवा :प-रस-गंधा काे हमारे ऐन्द्रिक अनुभवों में साकार कर देता है तो बिंब का निमा़ण होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिंब की खोज करें। २- जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो] :पक कहलाता है। इस कविता में से :पक का चुनाव करें। कला की बात • बगुलों के पंख कविता काे पढ़ने पर आपके मन में वैफसे चिता उभरते हैं\ उनकी किसी भी अन्य कला माधयम में अभिव्यक्ति करें।

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