CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2
कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
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Kunwar Narayan
Summary
क कक किँुवर नारायणँुवर नारायणँुवर नारायणँुवर नारायणँुवर नारायण सामने] काेई दूसरा नहीं] इन दिनों (काव्य संग्रह)_ आऋमजयी (प्रबंधा काव्य)_ आकारों के आस-पास (कहानी संग्रह)_ आज और आज से पहले (समीक्षा)_ मेरे साक्षाऋकार (सामान्य) प्रमुख पुरस्कारः साहिऋय अकादेमी पुरस्कार] कुमारन आशान निद्नः सन्२०१७] दिल्ली में न जाने कब से बंद @ एक दिन इस तरह खुला घर का दरवाजा @ जैसे गद़ से ढँकी @ एक पुरानी किताब गद़ से ढँकी हर पुरानी किताब खोलने की बात कहने वाले वुँफवर नारायण ने सन्१९५० के आस-पास काव्य-लेखन की शुरफआत की। उन्होंने कविता के अलावा चिंतनपरक लेख] कहानियाँ और सिनेमा तथा अन्य कलाओं पर समीक्षाएँ भी लिखीं हैं] किंतु कविता की विधा काे उनके स्जन-कम़ में हमेशा प्राथमिकता प्राप्त रही। नयी कविता के दौर में] जब प्रबंधा काव्य का स्थान प्रबंधाऋव की दावेदार लंबी कविताएँ लेने लगीं तब कुँवर नारायण ने आऋमजयी जैसा प्रबंधा काव्य रचकर भरपूर प्रतिष्ठा प्राप्त की।
Section 1 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
आलोचक मानते हैं कि उनकी “कविता में व्यथ़ का उलझाव] अखबारी सतहीपन और वैचारिक धाुंधा के बजाय संयम] परिष्कार और साप़्ाफ-सुथरापन है।, भाषा और विषाय की विविधाता उनकी कविताओं के विशेषा गुण माने जाते हैं। उनमें यथाथ़ का खुरदरापन भी मिलता है और उसका सहज सौंदय़ भी। सीधाी घोषाणाएँ और प़्ौफसले उनकी कविताओं में नहीं मिलते क्योंकि जीवन काे मुकम्मल तौर पर समझने वाला एक खुलापन उनके कवि-स्वभाव की मूल विशेषाता है। इसीलिए संशय] संभ्रम प्रश्नाकुलता उनकी कविता के बीज शब्द हैं। वुँफवर जी पूरी तरह नागर संवेदना के कवि हैं। विवरण उनके यहाँ नहीं के बराबर है] पर वैयक्तिक और सामाजिक उफहापोह का तनाव पूरी व्यंजकता में सामने आता है। एक पंक्ति में कहंे तो इनकी तटस्थ वीतराग द्ष्टि नोच-खसोट] हिंसा-प्रतिहिंसा से सहमे हुए एक संवेदनशील मन के आलोड़नों के :प में पढ़ी जा सकती है। यहाँ पर वुँफवर नारायण कुी दो कविताएँ ली गई हंै। पहली कविता है कविता के बहाने जो इन दिनों संग्रह से ली गई है।
Section 2 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
आज का समय कविता के वजूद काे लेकर आशंकित है। शक है कि यांतिाकता के दबाव से कविता का अस्तिव नहीं रहेगा। ऐसे में यह कविता कविता की अपार संभावनाओं काे टटोलने का एक अवसर देती है। कविता के बहाने यह एक याता है जो चिडि़या] फूल से लेकर बच्च्ो तक की है। एक ओर प्रव्फति है दूसरी ओर भविष्य की ओर कदम बढ़ाता बच्चा। कहने की आवश्यकता नहीं कि चिडि़या की उड़ान की सीमा है] फूल के खिलने के साथ उसकी परिणति निश्चित है] लेकिन बच्चे के सपने असीम है। बच्चों के खेल में किसी प्रकार की सीमा का काेई स्थान नहीं होता। कविता भी शब्दों का खेल है और शब्दों के इस खेल में जड़] चेतन] अतीत] वत़मान और भविष्य सभी उपकरण माता हैं। इसीलिए जहाँ कहीं रचनाऋमक उफजा़ होगी वहाँ सीमाओं के बंद्न खुद-ब-खुद टूट जाते हैं। वो चाहें घर की सीमा हो] भाषा की सीमा हो या फिर समय की ही क्यों न हो। दूसरी कविता है बात सीद्ी थी पर जो काेई दूसरा नहीं संग्रह में संकलित है। कविता में कथ्य और माधयम के }ं} उकेरते हुए भाषा की सहजता की बात की गई है।
Section 3 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
हर बात के लिए कुछ खास शब्द नियत होते हैं ठीक वैसे ही जैसे हर पेंच के लिए एक निश्चित खाँचा होता है। अब तक जिन शब्दों काे हम एक-दूसरे के पया़य के :प में जानते रहे हैं उन सब के भी अपने विशेषा अथ़ होते हैं। अच्छी बात या अच्छी कविता का बनना सही बात का सही शब्द से जुड़ना होता है और जब ऐसा होता है तो किसी दबाव या अतिरिक्त मेहनत की ज:रत नहीं होती वह सहूलियत के साथ हो जाता है। कविता के बहाने @ बात सीधी थी पर कविता के बहानेकविता के बहानेकविता के बहानेकविता के बहानेकविता के बहाने कविता एक उड़ान है चिडि़या के बहाने कविता की उड़ान भला चिडि़या क्या जाने बाहर भीतर इस घर] उस घर कविता के पंख लगा उड़ने के माने चिडि़या क्या जाने\ कविता एक खिलना है फूलों के बहाने कविता का खिलना भला फूल क्या जाने! बाहर भीतर इस घर] उस घर बिना मुरझाए महकने के माने फूल क्या जाने\ कविता एक खेल है बच्चों के बहाने बाहर भीतर यह घर] वह घर सब घर एक कर देने के माने बच्चा ही जाने।
Section 4 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
बात बात सीद्ी थी पर बात सीद्ी थी पर एक बार भाषा के चक्कर में जरा टेढ़ी पँफस गई। उसे पाने की काेशिश में भाषा काे उलटा पलटा तोड़ा मरोड़ा घुमाया फिराया कि बात या तो बने या फिर भाषा से बाहर आए लेकिन इससे भाषा के साथ साथ बात और भी पेचीदा होती चली गई। सारी मुश्किल काे द्ैय़ से समझे बिना मैं पेंच काे खोलने के बजाए उसे बेतरह कसता चला जा रहा था क्यों कि इस करतब पर मुझे साप़्ाफ सुनाई दे रही थी तमाशबीनों की शाबाशी और वाह वाह। आखिरकार वही हुआ जिसका मुझे डर था जोर जबरदस्ती से बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी! हार कर मैंने उसे कील की तरह उसी जगह ठोंक दिया। कविता के बहाने @ बात सीधी थी पर उफपर से ठीकठाक पर अंदर से न तो उसमें कसाव था न ताकत!
Section 5 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
बात ने] जो एक शरारती बच्च्ो की तरह मुझसे खेल रही थी] मुझे पसीना पोंछते देख कर पूछा “क्या तुमने भाषा काे सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा\, अभ्यास अभ्यासअभ्यासअभ्यासअभ्यास कविता के साथ १- इस कविता के बहाने बताएँ कि ^सब घर एक कर देने के माने* क्या है\ २- ^उड़ने* और ^खिलने* का कविता से क्या संबंद्बनता है\ ३- कविता और बच्चे काे समानांतर रखने के क्या कारण हो सकते हैं\ ४- कविता के संदभ़ में ^बिना मुरझाए महकने के माने* क्या होते हैं\ ५- ^भाषा काे सहूलियत* से बरतने से क्या अभिप्राय है\ ६- बात और भाषा परस्पर जुड़े होते हैं] किंतु कभी-कभी भाषा के चक्कर में ^सीद्ी बात भी टेढ़ी हो जाती है* वैफसे\ ७- बात (कथ्य) के लिए नीचे दी गई विशेषाताओं का उचित बिंबों@मुहावरों से मिलान करें।
Section 6 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
बिंब@मुहावरा विशेषाता (क) बात की चूड़ी मर जाना कथ्य और भाषा का सही सामंजस्य बनना (ख) बात की पेंच खोलना बात का पकड़ में न आना (ग) बात का शरारती बच्चे की तरह खेलना बात का प्रभावहीन हो जाना (घ) पेंच काे कील की तरह ठोंक देना बात में कसावट का न होना (Ä) बात का बन जाना बात काे सहज और स्पष्ट करना बात भाषा कविता के आसपास * बात से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं। कुछ मुहावरों का प्रयोग करते हुए लिखें। व्याख्या करें * जोर जबरदस्ती से बात की चूड़ी मर गई और वह भाषा में बेकार घूमने लगी। चचा़ कीजिए * आद्ुनिक युग में कविता की संभावनाओं पर चचा़ कीजिए\ * चूड़ी] कील] पेंच आदि मूटा़ उपमानों के माधयम से कवि ने कथ्य की अमूटा़ता काे साकार किया है। भाषा काे सम्द्ध एवं संप्रेषाणीय बनाने में] बिबों और उपमानों के महटव पर परिसंवाद आयोजित करें। आपसदारी १- संुदर है सुमन] विहग सुंदर मानव तुम सबसे सुंदरतम। पंत की इस कविता में प्रव्फति की तुलना में मनुष्य काे अद्कि सुंदर और समथ़ बताया गया है।
Section 7 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
^कविता के बहाने* कविता में से इस आशय काे अभिव्यक्त करने वाले बिंदुओं की तलाश करें। २- प्रतापनारायण मिश्र का निबंद् ^बात* और नागाजु़न की कविता ^बातें* ढूँढ़ कर पढ़ें।
Section 8 of 'कविता के बहाने, बात सीधी थी पर' by Kunwar Narayan. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
Model exam answers, grammar & audio
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