CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2
पतंग
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Alok Dhanwa
Summary
आलोक धान्वाआलोक धान्वाआलोक धान्वाआलोक धान्वाआलोक धान्वा प्रकाशित उसके बाद भागी हुई लड़कियाँ] ब्रूनो की बेटियाँ से प्रसिद्धि] दुनिया रोज बनती है (एकमाता संग्रह) जहाँ नदियाँ समुद्र से मिलती हैं वहाँ मेरा क्या है मैं नहीं जानता लेकिन एक दिन जाना है उधार सातवें-आठवें दशक में कवि आलोक धान्वा ने बहुत छोटी अवस्था में अपनी गिनी-चुनी कविताओं से अपार लोकप्रियता अजि़त की। सन्१९७२-१९७३ में प्रकाशित इनकी आरंभिक कविताएँ हिंदी के अनेक गंभीर काव्यप्रेमियों काे जबानी याद रही हैं। आलोचकाें का तो मानना है कि उनकी कविताओं ने हिंदी कवियों और कविताओं काे कितना प्रभावित किया] इसका मूल्यांकन अभी ठीक से हुआ नहीं है। इतनी व्यापक ख्याति के बावजूद या शायद उसी की वजह से बनी हुई अपेक्षाओं के दबाव के चलते] आलोक धान्वा ने कभी थोक के भाव में लेखन नहीं किया। सन्७२ से लेखन आरंभ करने के बाद उनका पहला और अभी तक का एकमाता काव्य संग्रह सन्९८ में प्रकाशित हुआ।
Section 1 of 'पतंग' by Alok Dhanwa. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
काव्य संग्रह के अलावा वे पिछले दो दशकाें से देश के विभिÂ हिस्सों में सांस्व्फतिक एवं सामाजिक काय़कऋा़ के :प में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने जमशेदपुर में अधयिन-मंडलियों का संचालन किया और रंगकम़ तथा साहिऋय पर कई राष्ट्रीय संस्थानों एवं विश्वि|ालयों में अतिथि व्याख्याता के :प में भागीदारी की है। पाठ्यपुस्तक मंे ली गई कविता पतंग आलोक धान्वा के एकमाता संग्रह का हिस्सा है। यह एक लंबी कविता है जिसके तीसरे भाग काे पाठ्यपुस्तक में शामिल किया गया है। पतंग के बहाने इस कविता में बालसुलभ इच्छाओं एवं उमंगों का सुंदर चिताण किया गया है। बाल क्रियाकलापों एवं प्रव्फति में आए परिवत़न काे अभिव्यक्त करने के लिए संुदर बिंबों का उपयोग किया गया है। पतंग बच्चों की उमंगों का रंग-बिरंगा सपना है। आसमान में उड़ती हुई पतंग ऊँचाइयों की वे हदें हैं] बालमन जिन्हें छूना चाहता है और उसके पार जाना चाहता है।
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कविता धाीरे-धाीरे बिंबों की एक ऐसी नयी दुनिया में ले जाती है जहाँ शरद ऋतु का चमकीला इशारा है] जहाँ तितलियों की रंगीन दुनिया है] दिशाओं के म्दंग बजते हैं। जहाँ छतों के खतरनाक काेने से गिरने का भय है तो दूसरी ओर भय पर विजय पाते बच्चे हैं जो गिर-गिरकर सँभलते हैं और प्थ्वी का हर काेना खुद-ब-खुद उनके पास आ जाता है। वे हर बार नयी-नयी पतंगों काे सबसे ऊँचा उड़ाने का हौसला लिए फिर-फिर भादो(अँधोरे)के बाद के शरद(उजाला)की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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क्या आप भी उनके साथ हैं\ पतंग पतंग पतंगपतंग पतंगपतंग सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया सवेरा हुआ खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा शरद आया पुलों काे पार करते हुए अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए घंटी बजाते हुए जोर-जोर से चमकीले इशाराें से बुलाते हुए पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड काे चमकीले इशाराें से बुलाते हुए और आकाश काे इतना मुलायम बनाते हुए कि पतंग उफपर उठ सके दुनिया की सबसे हलकी और रंगीन चीज उड़ सके दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके बाँस की सबसे पतली कमानी उड़ सके कि शु: हो सके सीटियों] किलकारियों और तितलियों की इतनी नाजुक दुनिया प्थ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास जब वे दौड़ते हैं बेसुधा छतों काे भी नरम बनाते हुए दिशाओं काे म्दंग की तरह बजाते हुए जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं डाल की तरह लचीले वेग से अकसर छतों के खतरनाक किनाराें तक उस समय गिरने से बचाता है उन्हें सिप़्ा़फ उनके ही रोमंाचित शरीर का संगीत पतंगों की धाड़कती उफँचाइयाँ उन्हें थाम लेती हैं महज एक धागे के सहारे पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं अपने रंधा्रों के सहारे अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनाराें से और बच जाते हैं तब तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं प्थ्वी और भी तेज घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास।
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पतंग अभ्यास अभ्यासअभ्यास अभ्यासअभ्यास कविता के साथ १- ^सबसे तेज बौछारें गयीं] भादो गया* के बाद प्रव्फति में जो परिवत़न कवि ने दिखाया है] उसका वण़न अपने शब्दों में करें। २- सोचकर बताएँ कि पतंग के लिए सबसे हलकी और रंगीन चीज] सबसे पतला कागज] सबसे पतली कमानी जैसे विशेषाणों का प्रयोग क्यों किया है\ ३- बिंब स्पष्ट करें सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया सवेरा हुआ खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा शरद आया पुलों काे पार करते हुए अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए घंटी बजाते हुए जोर-जोर से चमकीले इशाराें से बुलाते हुए और आकाश काे इतना मुलायम बनाते हुए कि पतंग उफपर उठ सके। कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंधा बन सकता है। ५- पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं बच्चों कुा उड़ान से वैफसा संबंद्बनता है\ ६- निम्नलिखित पंकि्ऋायों काे पढ़ कर प्रश्नों का उटार दीजिए।
Section 5 of 'पतंग' by Alok Dhanwa. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
(क) छतों काे भी नरम बनाते हुए दिशाओं काे म्दंग की तरह बजाते हुए (ख) अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनाराें से और बच जाते हैं तब तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हंै। * दिशाओं काे म्ंदग की तरह बजाने का क्या ताऋपय़ है\ * जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपकाे छत कठोर लगती है\ * खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं काे वैफसा महसूस करते हैं\ कविता के आसपास १- आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों काे देखकर आपके मन में वैफसे खयाल आते हैं\ लिखिए २- ^रोमांचित शरीर का संगीत* का जीवन के लय से क्या संबंधा है\ ३- ^महज एक धागे के सहारे] पतंगों की धाड़कती ऊँचाइयाँ* उन्हें (बच्चों काे) वैफसे थाम लेती हैं\ चचा़ करें। आपकी कविता १- हिंदी साहिऋय के विभिÂ कालों में तुलसी] जायसी] मतिराम] ि}जदेव] मैथिलीशरण गुप्त आदि कवियों ने भी शरद ऋतु का सुंदर वण़न किया है।
Section 6 of 'पतंग' by Alok Dhanwa. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
आप उन्हें तलाश कर कक्षा में सुनाएँ और चचा़ करें कि पतंग कविता में शरद ऋतु वण़न उनसे किस प्रकार भिÂ है\ २- आपके जीवन में शरद ऋतु क्या मायने रखती है\
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