CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · आरोह भाग 2
पहलवान की ढोलक
Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 12 Hindi.
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Phanishwar Nath Renu
Summary
फणीश्वर नाथ रेणुफणीश्वर नाथ रेणुफणीश्वर नाथ रेणुफणीश्वर नाथ रेणुफणीश्वर नाथ रेणु अब अररिया) बिहार में जुलूस] कितने चौराहे (उपन्यास)_ ठुमरी] अगिानखोर] आदमि रातिा की महक] एक श्रावणी दोपहरी की धाूप (कहानी-संग्रह)_ ऋणजल धानजल] वनतुलसी की गंधा] श्रुत-अश्रुत पूव़ (संस्मरण)_ नेपाली क्रांति कथा (रिपोता़ज)_ तथा रेणु रचनावली निधानः ११ अप्रैल] सन्१९७७ पटना में कुछ ऐसे चरिता होते हैं जो प्राण-प्रतिष्ठा पाते ही अपने सिरजनहार के बँद्े-बँधए नियम-कानून] नीति अथवा प़्ाफामू़ले काे तोड़कर बाहर निकल आते हैं और अपने जीवन काे अपने मन के मुताबिक गढ़ने लगते हैं। हिंदी साहिऋय में आंचलिक उपन्यासकार के :प में प्रतिष्ठित कथाकार फणीश्वर नाथ रेणु का जीवन उतार-चढ़ावों एवं संघषाोएं से भरा हुआ था। साहिऋय के अलावा विभिÂ राजनैतिक एवं सामाजिक आंदोलनों में भी उन्होंने सक्रिय भागीदारी की। उनकी यह भागीदारी एक ओर देश के निमा़ण में सक्रिय रही तो दूसरी ओर रचनाऋमक साहिऋय काे नया तेवर देने में सहायक रही।
Section 1 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
सन्१९५४ में उनका बहुचचि़्ात आंचलिक उपन्यास मैला आँचल प्रकाशित हुआ जिसने हिंदी उपन्यास काे एक नयी दिशा दी। हिंदी जगत में आंचलिक उपन्यासों पर विमश़ मैला आँचल से ही प्रारंभ हुआ। आंचलिकता की अवधारणा ने कथा-साहिऋय में गाँव की भाषा-संस्व्फति और वहाँ के लोक जीवन काे वेंफद्र में ला खड़ा किया। लोकगीत] लोकाेक्ति] लोकसंस्व्फति] लोकभाषा एवं लोकनायक की इस अवधारणा ने भारी-भरकम चीज एवं नायक की जगह अंचल काे ही नायक बना डाला। उनकी रचनाओं में अंचल कच्चे और अनगढ़ :प में ही आता है इसीलिए उनका यह अंचल एक तरप़्ाफ शस्य-श्यामल है तो दूसरी तरप़्ाफ धाूल भरा और मैला भी। स्वातंत्योटार भारत में जब सारा विकास शहर-वेंफद्रित होता जा रहा था। ऐसे में रेणु ने अपनी रचनाओं से अंचल की समस्याओं की ओर भी लोगों का धयान खींचा। उनकी रचनाएँ इस अवधारणा काे भी पुष्ट करती हैं कि भाषा की साथ़कता बोली के साहचय़ में ही है। फणीश्वर नाथ रेणु की प्रतिनिधिा कहानियों में पहलवान की ढोलक भी शामिल है।
Section 2 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
यह कहानी कथाकार रेणु की समस्त विशेषाताओं काे एक साथ अभिव्यक्त करती है। रेणु की लेखनी में अपने गाँव] अंचल एवं संस्व्फति काे सजीव करने की अद्भुत क्षमता है। ऐसा लगता है मानो हरेक पाता वास्तविक जीवन ही जी रहा हो। पाताों एवं परिवेश का इतना सच्चा चिताण अऋयंत दुल़भ है। रेणु वैसे गिने-चुने कथाकारों में से हैं जिन्होंने ग| में भी संगीत पैदा कर दिया है] अन्यथा ढोलक की उठती-गिरती आवाज और पहलवान के क्रियाकलापों का ऐसा सामंजस्य दुल़भ है। इन विशेषाताओं के साथ रेणु की यह कहानी व्यवस्था के बदलने के साथ लोक-कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। राजा साहब की जगह नए राजकुमार का आकर जम जाना सिप़फ व्यक्तिगत सटा परिवत़न नहीं_ बल्कि जमीनी पुरानी व्यवस्था के पूरी तरह उलट जाने और उस पर सभ्यता के नाम पर एकदम नयी व्यवस्था के आरोपित हो जाने का प्रतीक है।
Section 3 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
यह ^भारत* पर ^इंडिया* के छा जाने की समस्या है] जो लु^न पहलवान काे लोक-कलाकार के आसन से उठा कर पेट-भरने के लिए हाय-तौबा करने वाली निरीहता की भूमि पर पटक देती है। ऐसी स्थिति में गाँव की गरीबी पहलवानी जैसे शौक काे क्या पालती\ फिर भी] पहलवान जीवट ढोल के बोल में अपने आपकाे न सिप़्ा़फ जिलाए रखता है] बल्कि भूख व महामारी से दम तोड़ रहे गाँव काे मौत से लड़ने की ताकत भी देते रहता है। कहानी के अंत में भूख-महामारी की शक्ल में आए मौत के षाड्यंता जब अजेय लु^न की भरी-पूरी पहलवानी काे फटे ढोल की पोल में बदल देते हैं] तो इस करफणा@तासदी में लु^न हमारे सामने कई सवाल छोड़ जाता है। वह पोल पुरानी व्यवस्था की है या नयी व्यवस्था की\ क्या कला की प्रासंगिकता व्यवस्था की मुखापेक्षी है अथवा उसका काेई स्वतंता मूल्य भी है\ मनुष्यता की साद्ना और जीवन-सौंदय़ के लिए लोक कलाओं काे प्रासंगिक बनाए रखने हेतु हमारी क्या भूमिका हो सकती है\ निश्चय ही यह पाठ हमारे मन में कई ऐसे प्रश्न छोड़ जाता है।
Section 4 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
फणीश्वर नाथ रेणु पहलवान की ढोलक जाड़े का दिन। अमावस्या की रात ठंडी और काली। मलेरिया और हैजे से पीडि़त गाँव भयाटा़ शिशु की तरह थर-थर काँप रहा था। पुरानी और उजड़ी बाँस-फूस की झोंपडि़यों में अंधाकार और सन्नाटे का सम्मिलित साम्राज्य! अँधोरा और निस्तब्धाता! अँधोरी रात चुपचाप आँसू बहा रही थी। निस्तब्धाता करफण सिसकियों और आहों काे बलपूव़क अपने त्रदय में ही दबाने की चेष्टा कर रही थी। आकाश में तारे चमक रहे थे। प्थ्वी पर कहीं प्रकाश का नाम नहीं। आकाश से टूटकर यदि काेई भावुक तारा प्थ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेषा हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे। सियाराें का व्रंफदन और पेचक की डरावनी आवाज कभी-कभी निस्तब्धाता काे अवश्य भंग कर देती थी। गाँव की झोंपडि़यों से कराहने और वैफ करने की आवाज] ^हरे राम! हे भगवान!* की टेर अवश्य सुनाई पड़ती थी। बच्चे भी कभी-कभी निब़ल कंठों से ^माँ-माँ* पुकारकर रो पड़ते थे।
Section 5 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
पर इससे रातिा की निस्तब्धाता में विशेषा बाधा नहीं पड़ती थी। कुटाों में परिस्थिति काे ताड़ने की एक विशेषा बुद्धि होती है। वे दिन-भर राख के घूरों पर गठरी की तरह सिकुड़कर] मन मारकर पड़े रहते थे। संधया या गंभीर रातिा काे सब मिलकर रोते थे। रातिा अपनी भीषाणताओं के साथ चलती रहती और उसकी सारी भीषाणता काे] ताल ठोकिर] लिकारती रहती थी सिप़्ा़फ पहलवान की ढोलक! संधया से लेकर प्रातःकाल तक एक ही गति से बजती रहती ^चट्-धा] गिड़-धा]…चट्-धा] गिड़-धा!* यानी ^आ जा भिड़ जा] आ जा] भिड़ जा!*… बीच-बीच में ^चटाव्फ-चट्-धा] चटाव्फ-चट्-धा!* यानी ^उठाकर पटक दे! उठाकर पटक दे!!* यही आवाज म्त-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी। लु^न सिंह पहलवान! यों तो वह कहा करता था ^लु^न सिंह पहलवान काे होल इंडिया भर के लोग जानते चट्-धा] गिड़ ---धा] - आ जा भिड़ जा चट्-धा] गिड़ ---धा] - आ जा भिड़ जा पहलवान की ढोलक १०१ १०२ हैं*] किंतु उसके ^होल-इंडिया* की सीमा शायद एक जिले की सीमा के बराबर ही हो।
Section 6 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
जिले भर के लोग उसके नाम से अवश्य परिचित थे। लु^न के माता-पिता उसे नौ वषा़ की उम्र में ही अनाथ बनाकर चल बसे थे। सौभाग्यवश शादी हो चुकी थी] वरना वह भी माँ-बाप का अनुसरण करता। विधावा सास ने पाल-पोस कर बड़ा किया। बचपन में वह गाय चराता] धाराेष्ण दूधा पीता और कसरत किया करता था। गाँव के लोग उसकी सास काे तरह-तरह की तकलीप़्ाफ दिया करते थे_ लु^न के सिर पर कसरत की धाुन लोगों से बदला लेने के लिए ही सवार हुई थी। नियमित कसरत ने किशोरावस्था में ही उसके सीने और बाँहों काे सुडौल तथा मांसल बना दिया था। जवानी में कदम रखते ही वह गाँव में सबसे अच्छा पहलवान समझा जाने लगा। लोग उससे डरने लगे और वह दोनों हाथों काे दोनों ओर ४५ डिग्री की दूरी पर पैफलाकर] पहलवानों की भाँति चलने लगा। वह कुश्ती भी लड़ता था। एक बार वह ^दंगल* देखने श्यामनगर मेला गया। पहलवानों की कुश्ती और दाँव-पेंच देखकर उससे नहीं रहा गया। जवानी की मस्ती और ढोल की लिकारती हुई आवाज ने उसकी नसों में बिजली उऋपÂ कर दी।
Section 7 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
उसने बिना कुछ सोचे-समझे दंगल में ^शेर के बच्चे* काे चुनौती दे दी। ^शेर के बच्चे* का असल नाम था चाँद सिंह। वह अपने गुरफ पहलवान बादल सिंह के साथ] पंजाब से पहले-पहल श्यामनगर मेले में आया था। सुंदर जवान] अंग-प्रऋयंग से सुंदरता टपक पड़ती थी। तीन दिनों में ही पंजाबी और पठान पहलवानों के गिरोह के अपनी जोड़ी और उम्र के सभी प_ों काे पछाड़कर उसने ^शेर के बच्चे* की टायटिल प्राप्त कर ली थी। इसलिए वह दंगल के मैदान में लँगोट लगाकर एक अजीब किलकारी भरकर छोटी दुलकी लगाया करता था। देशी नौजवान पहलवान] उससे लड़ने की कल्पना से भी घबराते थे। अपनी टायटिल काे सऋय प्रमाणित करने के लिए ही चाँद सिंह बीच-बीच में दहाड़ता फिरता था। श्यामनगर के दंगल और शिकार-प्रिय व्द्ध राजा साहब उसे दरबार में रखने की बातें तो किंचित] उसकुी स्पधा़ पर मुसाकुराया फिर बाज की तरह उस पर टूट पड़ा। शांत दश़काें की भीड़ में खलबली मच गई ^पागल है पागल] मरा ऐं! मरा-मरा!*… पर वाह रे बहादुर!
Section 8 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
लु^न बड़ी सप़्ाफाई से आक्रमण काे सँभालकर निकलकर उठ खड़ा हुआ और पैंतरा दिखाने लगा। राजा साहब ने कुश्ती बंद करवाकर लु^न काे अपने पास बुलवाया और समझाया। अंत में] उसकी हिम्मत की प्रशंसा करते हुए] दस #पये का नोट देकर कहने लगे ^^जाओ] मेला देखकर घर जाओ!…** पहलवान की ढोलक १०३ ^^नहीं सरकार] लड़ेंगे… हुकुम हो सरकार…!** ^^तुम पागल हो] …जाओ!…** मैनेजर साहब से लेकर सिपाहियों तक ने धामकाया ^^देह में गोश्त नहीं] लड़ने चला है शेर के बच्चे से! सरकार इतना समझा रहे हैं…!!** ^^दुहाई सरकार] पऋथर पर माथा पटकिर मर जाउफँगा… मिले हुकुम!** वह हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा था। भीड़ अधाीर हो रही थी। बाजे बंद हो गए थे। पंजाबी पहलवानों की जमायत क्रोधा से पागल होकर लु^न पर गालियों की बौछार कर रही थी। दश़काें की मंडली उटोजित हो रही थी। काेई-काेई लु^न के पक्ष से चिल्ला उठता था ^^उसे लड़ने दिया जाए!** अकेला चाँद सिंह मैदान में खड़ा व्यथ़ मुसकुराने की चेष्टा कर रहा था।
Section 9 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
पहली पकड़ में ही अपने प्रति}ं}ी की शक्ति का अंदाजा उसे मिल गया था। विवश होकर राजा साहब ने आज्ञा दे दी “लड़ने दो!, बाजे बजने लगे। दश़्काें में फिर उटोजना पैफली। काेलाहल बढ़ गया। मेले के दुकानदार दुकान बंद करके दौड़े “चाँद सिंह की जोड़ी-चाँद की कुश्ती हो रही है!!, ^चट्-धा] गिड़-धा] चट्-धा] गिड़-धा…* भरी आवाज में एक ढोल-जो अब तक चुप था बोलने लगा ^ढाक्-ढिना] ढाव्फ-ढिना] ढाव्फ-ढिना…* (अथा़त्-वाह प_े! वाह प_े !!) लु^न काे चाँद ने कसकर दबा लिया था। “अरे गया-गया!!, दश़काें ने तालियाँ बजाएं “हलुआ हो जाएगा] हलुआ-! हँसी-खेल नहीं-शेर का बच्चा है…बच्चू!, ^चट्-गिड़-धा] चट्-गिड़-धा] चट्-गिड़-धा…* (मत डरना] मत डरना] मत डरना…) लु^न की गद़न पर केहुनी डालकर चाँद ^चिटा* करने की काेशिश कर रहा था। “वहीं दप़्ाफना दे] बहादुर!, बादल सिंह अपने शिष्य काे उऋसाहित कर रहा था। लु^न की आँखें बाहर निकल रही थीं। उसकी छाती फटने-फटने काे हो रही थी। राजमत] बहुमत चाँद के पक्ष में था। सभी चाँद काे शाबाशी दे रहे थे।
Section 10 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
लु^न के पक्ष में सिप़्ा़फ ढोल की आवाज थी] जिसकुी ताल पर वह अपनी शक्ति और दाँव-पेंच की परीक्षा ले रहा था अपनी हिम्मत काे बढ़ा रहा था। अचानक ढोल की एक पतली आवाज सुनाई पड़ी ^धाक-धिाना] तिरकट-तिना] धाक-धिाना] तिरकट-तिना…!!* लु^न काे स्पष्ट सुनाई पड़ा] ढोल कह रहा था “दाँव काटो] बाहर हो जा दाँव काटो] बाहर हो जा!!, १०४ लोगों के आश्चय़ की सीमा नहीं रही] लु^ न दाँव काटकर बाहर निकला और तुरंत लपकिर उसने चाँद की गद़न पकड़ ली। “वाह रे मि^ी के शेर!, “अच्छा! बाहर निकल आया\ इसीलिए तो…-।, जनमत बदल रहा था। मोटी और भौंड़ी आवाज वाला ढोल बज उठा ^चटाक्-चट्-धा]चटाक्-चट्-धा…*(उठा पटक दे! उठा पटक दे!!) लु^न ने चालाकी से दाँव और जोर लगाकर चाँद काे जमीन पर दे मारा। ^धिाना-धिाना] धिाक-धिाना!*(अथा़त्चित करो] चित करो!!) लु^न ने अंतिम जोर लगाया चाँद सिंह चाराें खाने चित हो रहा। ^धा-गिड़-गिड़] धा-गिड़-गिड़] धा-गिड़-गिड़]*…(वाह बहादुर! वाह बहादुर!! वाह बहादुर!!) जनता यह स्थिर नहीं कर सकी कि किसकी जय-धवनि की जाए।
Section 11 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
फलतः अपनी-अपनी इच्छानुसार किसी ने ^माँ दुगा़ की*] ^महावीर जी की*] कुछ ने राजा श्यामानंद की जय-धवनि की। अंत में सम्मिलित ^जय!* से आकाश गूँज उठा। विजयी लु^न कूदता-फाँदता] ताल-ठोंकता सबसे पहले बाजे वालों की ओर दौड़ा और ढोलों काे श्रद्धापूव़क प्रणाम किया। फिर दौड़कर उसने राजा साहब काे गोद में उठा लिया। राजा साहब के कीमती कपड़े मि^ी में सन गए। मैनेजर साहब ने आपटिा की “हें-हें…अरे-रे!, किंतु राजा साहब ने स्वयं उसे छाती से लगाकर गद्गद होकर कहा “जीते रहो] बहादुर! तुमने मि^ी की लाज रख ली!, पंजाबी पहलवानों की जमायत चाँद सिंह की आँखें पोंछ रही थी। लु^न काे राजा साहब ने पुरस्व्फत ही नहीं किया] अपने दरबार में सदा के लिए रख लिया। तब से लु ^न राज-पहलवान हो गया और राजा साहब उसे लु ^न सिंह कहकर पुकारने लगे। राज-पंडितों ने मुँह बिचकाया “हुजूर! जाति का … सिंह…!, मैनेजर साहब क्षतिाय थे। ^क्लीन-शेव्ड* चेहरे काे संकुचित करते हुए] अपनी शक्ति लगाकर नाक के बाल उखाड़ रहे थे।
Section 12 of 'पहलवान की ढोलक' by Phanishwar Nath Renu. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
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