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Sukta 77

Mandala 8 · 11 rks

11 rks · free forever

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  1. Rk 1

    ज॒ज्ञा॒नो नु श॒तक्र॑तु॒र्वि पृ॑च्छ॒दिति॑ मा॒तर॑म् क उ॒ग्राः के ह॑ शृण्विरे

  2. Rk 2

    आदीं॑ शव॒स्य॑ब्रवीदौर्णवा॒भम॑ही॒शुव॑म् ते पु॑त्र सन्तु नि॒ष्टुरः॑

  3. Rk 3

    समित्तान्वृ॑त्र॒हाखि॑द॒त्खे अ॒राँ इ॑व॒ खेद॑या प्रवृ॑द्धो दस्यु॒हाभ॑वत्

  4. Rk 4

    एक॑या प्रति॒धापि॑बत्सा॒कं सरां॑सि त्रिं॒शत॑म् इन्द्रः॒ सोम॑स्य काणु॒का

  5. Rk 5

    अ॒भि ग॑न्ध॒र्वम॑तृणदबु॒ध्नेषु॒ रजः॒स्वा इन्द्रो॑ ब्र॒ह्मभ्य॒ इद्वृ॒धे

  6. Rk 6

    निरा॑विध्यद्गि॒रिभ्य॒ आ धा॒रय॑त्प॒क्वमो॑द॒नम् इन्द्रो॑ बु॒न्दं स्वा॑ततम्

  7. Rk 7

    श॒तब्र॑ध्न॒ इषु॒स्तव॑ स॒हस्र॑पर्ण॒ एक॒ इत् यमि॑न्द्र चकृ॒षे युज॑म्

  8. Rk 8

    तेन॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र॒ नृभ्यो॒ नारि॑भ्यो॒ अत्त॑वे स॒द्यो जा॒त ऋ॑भुष्ठिर

  9. Rk 9

    ए॒ता च्यौ॒त्नानि॑ ते कृ॒ता वर्षि॑ष्ठानि॒ परी॑णसा हृ॒दा वी॒ड्व॑धारयः

  10. Rk 10

    विश्वेत्ता विष्णु॒राभ॑रदुरुक्र॒मस्त्वेषि॑तः श॒तं म॑हि॒षान्क्षी॑रपा॒कमो॑द॒नं व॑रा॒हमिन्द्र॑ एमु॒षम्

  11. Rk 11

    तु॒वि॒क्षं ते॒ सुकृ॑तं सू॒मयं॒ धनुः॑ सा॒धुर्बु॒न्दो हि॑र॒ण्ययः॑ उ॒भा ते॑ बा॒हू रण्या॒ सुसं॑स्कृत ऋदू॒पे चि॑दृदू॒वृधा॑

Sukta 77 · Mandala 8 · Rig Veda · Heritage | Lipi