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Sukta 187

Mandala 10 · 5 rks

5 rks · free forever

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  1. Rk 1

    प्राग्नये॒ वाच॑मीरय वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम् स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

  2. Rk 2

    यः पर॑स्याः परा॒वत॑स्ति॒रो धन्वा॑ति॒रोच॑ते स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

  3. Rk 3

    यो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑ति॒ वृषा॑ शु॒क्रेण॑ शो॒चिषा॑ स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

  4. Rk 4

    यो विश्वा॒भि वि॒पश्य॑ति॒ भुव॑ना॒ सं च॒ पश्य॑ति स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

  5. Rk 5

    यो अ॒स्य पा॒रे रज॑सः शु॒क्रो अ॒ग्निरजा॑यत स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑