CBSE Class 12 · Hindi 1st Language · वितान भाग 2
सिल्वर वैडिंग
Chapter summary, hard words and model exam answers for CBSE Class 12 Hindi.
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Manohar Shyam Joshi
Summary
जब सेक्शन आपि़्ाफसर वाई-डी- (यशोधार) पंत ने आखिरी प़् फाइल का लाल फीता बाँधाकर निगाह मेज से उठाई तब दुक़तर की पुरानी दीवार घड़ी पाँच बजकर पच्चीस मिनट बजा रही थी। उनकी अपनी कलाई घड़ी में साढ़े पाँच बज रहे थे। पंतजी अपनी घड़ी रोजाना सुबह-शाम रेडियो समाचाराें से मिलाते हैं इसलिए उन्होंने दुक़तर की घड़ी काे ही सुस्त ठहराया। प़्ाफाइल आउट ट्रे में डालकर उन्होंने एक निगाह अपने मातहतों पर डाली जो उनके ही कारण पाँच बजे के बाद भी दुक़तर में बैठने काे मजबूर होते हैं। चलते-चलते जूनियरों से काेई मनोरंजक बात कर दिन भर के शुष्क व्यवहार का निराकरण कर जाने की कृष्णानंद (किशनदा) पांडे से मिली हुई परंपरा का पालन करते हुए उन्होंने कहा] “आप लोगों की देखादेखी सेक्शन की घड़ी भी सुस्त हो गई है!, सिल्वर वैडिंग मनोहर श्याम जोशी सीधो ^असिस्टेंट ग्रेड* में आए नए छोकरे चइा ने] जिसकी चौड़ी मोहरीवाली पतलून और ऊँची एड़ी वाले जूते पंतजी काे] ^सम हाउ इंçापर* मालूम होते हैं] थोड़ी बदतमीजी-सी की।
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^ऐज यूजुअल* बोला] “बड़े बाऊ] आपकी अपनी चूनेदानी का क्या हाल है\ वक्त सही देती है\, पंतजी ने चइा की धा्ष्टता काे अनदेखा किया और कहा] “मिनिट-टू-मिनिट करेक्ट चलती है।, चइा ने कुछ और धा्ष्ट होकर पंतजी की कलाई थाम ली। इस तरह की धा्ष्टता का çकट विरोधा करना यशोधार बाबू ने छोड़ दिया है। मन-ही-मन वह उस जमाने की याद ज:र करते हैं जब दुक़तर में वह किशनदा काे भाई नहीं ^साहब* कहते और समझते थे। घड़ी की ओर देखकर वह बोला] “बाबा आदम के जमाने की है बड़े बाऊ यह तो! अब तो डिजिटल ले लो एक जापानी। सस्ती मिल जाती है।, “यह घड़ी मुझे शादी में मिली थी। हम पुरानी चाल के] हमारी घड़ी पुरानी चाल की। अरे यही बहुत है कि अब तक ^राईट टाईम* चल रही है क्यों वैफसी रही\, इस तरह का नहले पर दहला जवाब देते हुए एक हाथ आगे बढ़ा देने की परंपरा थी] रेम्जे स्कूल] अल्मोड़ा में जहाँ से कभी यशोधार बाबू ने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।
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इस तरह के आगे बढ़े हुए हाथ पर सुनने वाला बतौर दाद अपना हाथ मारा करता था और वक्ता-श्रोता दोनों ठठाकर हाथ मिलाया करते थे। ऐसी ही परंपरा किशनदा के क्वाट़र में भी थी जहाँ रोजी-रोटी की तलाश में आए यशोधार पंत नामक एक मैट्रिक पास बालक काे शरण मिली थी कभी। किशनदा वुँफआरे थे और पहाड़ से आए हुए कितने ही लड़के ठीक-ठिकाना होने से पहले उनके यहाँ रह जाते थे। मैस जैसी थी। मिलकर लाओ] पकाओ] खाओ। यशोधार बाबू जिस समय दिल्ली आए थे उनकी उम्र सरकारी नौकरी के लिए कम थी। काेशिश करने पर भी ^बाॉय सवि़स* में वह नहीं लगाए जा सके। तब किशनदा ने उन्हें मैस का रसोइया बनाकर रख लिया। यही नहीं] उन्होंने यशोधार काे पचास रफपये उधार भी दिए कि वह अपने लिए कपड़े बनवा सके और गाँव पैसा भेज सके। बाद में इन्हीं किशनदा ने अपने ही नीचे नौकरी दिलवाई और दुक़तरी जीवन में माग़-दश़न किया।
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चइा ने जोर से कहा] “बड़े बाऊ] आप किन खयालों में खो गए\ मेनन पूछ रहा है कि आपकी शादी हुई कब थी\, यशोधार बाबू ने सकपकाकर अपना बढ़ा हुआ हाथ वापस खींचा और मेनन से मुखातिब होकर बोले] “नाव लैट मी सी] आई वाॉज मैरिड ऑन सिक्स्थ प़्ाफरवरी नाइंटिन प़्ाफोटी़ सेवन।, सिल्वर वैडिंग मेनन ने प़्ाफौरन हिसाब लगाया और चहकिर बोला] “मैनी हैप्पी रिटऩ्स आप़्ाफ द डे सर! आज तो आपका ^सिल्वर वैडिंग* है। शादी काे पूरा पच्चीस साल हो गया।, यशोधार जी खुश होते हुए झेंपे और झेंपते हुए खुश हुए। यह अदा उन्हांेने किशनदा से सीखी थी। चइा ने घंटी बजाकर चपरासी काे बुलाया और कहा] “सुन भई भगवानदास] बड़े बाऊ से बड़ा नोट ले और सारे सेक्शन के लिए चा-पानी का इंतजाम कर फटाफट।, यशोधार जी बोले] “अरे ये ^वैडिंग एनिवस़री* वगैरह सब गोरे साहबों के चोंचले हैं हमारे यहाँ थोड़ी मानते हैं।, चइा बोला] “मिक्चर मत पिलाइए गुरफदेव। चाय-म_ी-लंू बस इतना ही तो सौदा है।
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इनमें काैन आपकी बड़ी माया निकली जानी है।, यशोधार बाबू ने जेब से बटुआ और बटुए में से दस का नोट निकाला और कहा] “आप लोग चाय पीजिए] ^दैट* तो ^आई डू नाट माइंड*] लेकिन जो हमारे लोगों में ^कस्टम* नहीं है] उस पर ^इनसिस्ट* करना] ^दैट* मैं ^समहाउ इंçाॉपर प़्ाफाइंड* करता हूँ।, चइा ने दस का नोट चपरासी काे दिया और पुनः बड़े बाऊ के आगे हाथ प्ौफला दिया कि एक नोट से सेक्शन का क्या बनता है\ रफपये तीस हों तो चुग्गे भर का जुगाड़ करा सवेंफ। सारा सेक्शन जानता है कि यशोधार बाबू अपने बटुए में सौ-डेढ़ सौ रफपये हमेशा रखते हैं भले ही उनका दैनिक खच़ नग.य है। और तो और] बस-टिकट का खच़ भी नहीं। गोल मावे़फट से ^सेव्रेफट्रिएट* तक पहले साइकिल में आते-जाते थे] इधार पैदल आने-जाने लगे हैं क्योंकि उनके बच्चे आधाुनिक युवा हो चले हैं और उन्हें अपने पिता का साइकिल-सवार होना सख्त नागवार गुजरता है। बच्चों के अनुसार साइकिल तो चपरासी चलाते हैं। बच्चे चाहते हैं कि पिताजी स्कूटर ले लें।
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लेकिन पिताजी काे ^समहाउ* स्कूटर निहायत बेहूदा सवारी मालूम होती है और कार जब ^अप़्ाफोड़* की नहीं जा सकती तब उसकी बात सोचना ही क्यों\ चइा के जोर देने पर बड़े बाऊ ने दस-दस के नोट दो और दे दिए लेकिन सारे सेक्शन के इसरार करने पर भी वह अपनी ^सिल्वर वैडिंग* की इस दावत के लिए रफके नहीं। मातहत लोगों से चलते-चलाते थोड़ा हँसी-मजाक कर लेना किशनदा की परंपरा में है। उनके साथ बैठकर चाय-पानी और गप्प-गप्पाष्टक में वक्त बरबाद करना उस परंपरा के विरफद्ध है। इधार यशोधार बाबू ने दुक़तर से लौटते हुए रोज बिड़ला मंदिर जाने और उसके उ|ान में बैठकर काेई çवचन सुनने अथवा स्वयं ही çभु का धयान लगाने की नयी रीत अपनाई है। यह बात उनके पऋनी-बच्चों काे बहुत अखरती है। बब्बा] आप काेई बु इे थोड़ी हैं जो रोज-रोज मंदिर जाएँ] इतने जयादा व्रत करें ऐसा कहते हैं वे। यशोधार बाबू इस आलोचना काे अनसुना कर देते हैं। सिद्धांत के धानी की] किशनदा के अनुसार] यही निशानी है!
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बिड़ला मंदिर से उठकर यशोधार बाबू पहाड़गंज जाते हैं और घर के लिए साग-सब्जी खरीद लाते हैं। किसी से मिलना-मिलाना हो तो वह भी इसी समय कर लेते हैं। तो भले ही दुक़तर पाँच बजे छूटता हो वह घर आठ बजे से पहले नहीं पहुँचते। आज बिड़ला मंदिर जाते हुए यशोधार बाबू की निगाह उस अहाते पर पड़ी जिसमें कभी किशनदा का तीन बैड:म वाला क्वाट़र हुआ करता था और जिस पर इन दिनों एक छह मंजिला इमारत बनाई जा रही है। इधार से गुजरते हुए कभी के ^डी-आई-जैड-* एरिया की बदलती शक्ल देखकर यशोधार बाबू काे बुरा-सा लगता है। ये लोग सारा गोल मावे़फट क्षेता तोड़कर यहाँ एक मंजिला क्वाट़रों की जगह ऊँची इमारतें बना रहे हैं। यशोधार बाबू काे पता नहीं कि वे लोग ठीक कर रहे हैं कि गलत कर रहे हैं। उन्हें यह ज:र पता है कि उनकी यादों के गोल मावे़फट के ढहाए जाने का गम मनाने के लिए उनका इस क्षेता में डटे रहना निहायत ज:री है।
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उन्हें एंड्रयूजगंज] ल{मीबाई नगर] पंडारा रोड आदि नयी बस्तियों में पद की गरिमा के अनु:प डी-२ टाइप क्वाट़र मिलने की अच्छी खबर कई बार आई है मगर हर बार उन्होंने गोल मावे़फट छोड़ने से इंकार कर दिया है। जब उनका क्वाट़र टूटने का नंबर आया तब भी उन्होंने इसी क्षेता की इन बस्तियों में बचे हुए क्वाट़रों में एक अपने नाम अलाट करा लिया। पऋनी के यह पूछने पर कि जब यह भी टूट जाएगा तब क्या करोगे\ उन्होंने कहा तब की तब देखी जाएगी। कहा और उसी तरह मुसाकुराए जिस तरह किशनदा यही पि़्ाफकरा कह कर मुसाकुराते थे। सच तो यह है कि पिछले कई वषाोएं से यशोधार बाबू का अपनी पऋनी और बच्चों से हर छोटी-बड़ी बात में मतभेद होने लगा है और इसी वजह से वह घर जल्दी लौटना पसंद नहीं करते। जब तक बच्चे छोटे थे तब तक वह उनकी पढ़ाई-लिखाई में मदद कर सकते थे। सिल्वर वैडिंग अब बड़ा लड़का एक çमुख विज्ञापन संस्था में नौकरी पा गया है। य|पि ^समहाउ* यशोधार बाबू काे अपने साधारण पुता काे असाधारण वेतन देने वाली यह नौकरी कुछ समझ में आती नहीं।
Section 8 of 'सिल्वर वैडिंग' by Manohar Shyam Joshi. Read the Hindi passage; use Words tab for hard words.
वह कहते हैं कि डेढ़ हजार रफपया तो हमें अब रिटायरमेंट के पास पहुँच कर मिला है] शु: में ही डेढ़ हजार रफपया देने वाली इस नौकरी में ज:र कुछ पेंच होगा। यशोधार जी का दूसरा बेटा दूसरी बार आई-ए-एस- देने की तैयारी कर रहा है और यशोधार बाबू के लिए यह समझ सकना असंभव है कि जब यह पिछले साल ^एलाइड सवि़सेज* की सूची में] माना काप़्ाफी नीचे आ गया था] तब इसने ^ज्वाइन* करने से इंकार क्यों कर दिया\ उनका तीसरा बेटा स्कालरशिप लेकर अमरीका चला गया है और उनकी एकमाता बेटी न केवल तमाम çस्तावित वर अस्वीकार करती चली जा रही है बल्कि डाक्टरी की उच्चतम शिक्षा के लिए स्वयं भी अमरीका चले जाने की धामकी दे रही है। यशोधार बाबू जहाँ बच्चों की इस तरक्की से खुश होते हैं वहाँ ^समहाउ* यह भी अनुभव करते हैं कि वह खुशहाली भी वैफसी जो अपनों में परायापन पैदा करे। अपने बच्चों }ारा गरीब रिश्तेदाराें की उपेक्षा उन्हें ^समहाउ* जँचती नहीं। ^एनीवे जेनरेशनों में गैप तो होता ही है सुना* ऐसा कहकर स्वयं काे दिलासा देता है पिता।
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य|पि यशोधार बाबू की पऋनी अपने मूल संस्कारों से किसी भी तरह आधाुनिक नहीं है तथापि बच्चों की तरप़्ाफदारी करने की मात्सुलभ मजबूरी ने उन्हें भी माॉड बना डाला है। कुछ यह भी है कि जिस समय उनकी शादी हुई थी यशोधार बाबू के साथ गाँव से आए ताऊजी और उनके दो विवाहित बेटे भी रहा करते थे। इस संयुक्त परिवार में पीछे ही पीछे बहुओं में गजब के तनाव थे लेकिन ताऊजी के डर से काेई कुछ कह नहीं पाता था। यशोधार बाबू की पऋनी काे शिकायत है कि संयुक्त परिवार वाले उस दौर में पति ने हमारा पक्ष कभी नहीं लिया] बस जिठानियों की चलने दी। उनका यह भी कहना है कि मुझे आचार-व्यवहार के ऐसे बंधानों में रखा गया मानो मैं जवान औरत नहीं] बुढि़या थी। जितने भी नियम इनकी बुढि़या ताई के लिए थे] वे सब मुझ पर भी लागू करवाए ऐसा कहती है घरवाली बच्चों से। बच्चे उससे सहानुभूति व्यक्त करते हैं। फिर वह यशोधार जी से उन्मुख होकर कहती है तुम्हारी ये बाबा आदम के जमाने की बातें मेरे बच्चे नहीं मानते तो इसमें उनका काेई कसूर नहीं।
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मैं भी इन बातों काे उसी हद तक मानूँगी जिस हद तक सुभीता हो। अब मेरे कहने से वह सब ढोंग-ढकाेसला हो नहीं सकता साप़्ाफ बात। धाम़-कम़] कुल-परंपरा सबकाे ढोंग-ढकाेसला कहकर घरवाली आधाुनिकाओं-सा आचरण करती है तो यशोधार बाबू ^शानयल बुढि़या*] ^चटाई का लँहगा* या ^बूढ़ी मुँह मुँहासे] लोग करें तमासे* कहकर उसके विद्रोह काे मजाक में उड़ा देना चाहते हैं] अनदेखा कर देना चाहते हैं लेकिन यह स्वीकार करने काे बाधय भी हो जाते हैं कि तमाशा स्वयं उनका बन रहा है। जिस जगह किशनदा का क्वाट़र था उसके सामने खड़े होकर एक गहरा निःश्वास छोड़ते हुए यशोधार जी ने अपने से पूछा कि क्या यह ^बैटर* नहीं रहता कि किशनदा की तरह] घर-ग्हस्थी का बवाल ही न पाला होता और ^लाइप़्ाफ* कम्यूनिटी के लिए ^डेडीकेट* कर दी होती। फिर उनका धयान इस ओर गया कि बाल-जती किशनदा का बुढ़ापा सुखी नहीं रहा। उसके तमाम साथियों ने हौजखास] ग्रीनपाव़फ] वैफलाश कहीं-न-कहीं जमीन ली] मकान बनवाया] लेकिन उसने कभी इस ओर धयान ही नहीं दिया।
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रिटायर होने के छह महीने बाद जब उसे क्वाट़र खाली करना पड़ा तब] हद हो गई] उसके }ारा उपकृत इतने सारे लोगों में से एक ने भी उसे अपने यहाँ रखने की पेशकश नहीं की। स्वयं यशोधार बाबू उसके सामने ऐसा काेई çस्ताव नहीं रख पाए क्योंकि उस समय तक उनकी शादी हो चुकी थी और उनके दो कमरों के क्वाट़र में तीन परिवार रहा करते थे। किशनदा कुछ साल राजेंद्र नगर में किराए का क्वाट़र लेकर रहा और फिर अपने गाँव लौट गया जहाँ साल भर बाद उसकी म्ऋयु हो गई। जयादा पेंशन खा नहीं सका बेचारा! विचिता बात यह है कि उसे काेई भी बीमारी नहीं हुई। बस रिटायर होने के बाद मुरझाता-सूखता ही चला गया। जब उसके एक बिरादर से म्ऋयु का कारण पूछा तब उसने यशोधार बाबू काे यही जवाब दिया] “जो हुआ होगा।, यानी ^पता नहीं] क्या हुआ।* जिन लोगों के बाल-बच्चे नहीं होते] घर परिवार नहीं होता उनकी रिटायर होने के बाद ^जो हुआ होगा* से भी मौत हो जाती है यह जानते हैं यशोधार जी! बच्चों का होना भी ज:री है।
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Model exam answers, grammar & audio
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